Azaad bharat News/Raigarh/Chhattisgarh -रायपुर, 29 जुलाई। छत्तीसगढ़ के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक पदों पर नियमित भर्ती को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए नर्सिंग यूनियन ने जेएनएम मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई।
मेरिट सूची सार्वजनिक नहीं होने पर अभ्यर्थियों में नाराजगी
यूनियन के पदाधिकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया के तहत लगभग 2,000 आवेदकों की प्रारंभिक सूची जारी की गई थी। पात्र-अपात्र सूची और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेरिट के आधार पर चयन सूची तैयार की गई, लेकिन मेरिट सूची सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे अभ्यर्थियों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव को जारी किया नोटिस
मामले की सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव अमित कटारिया (आईएएस) को अवमानना याचिका पर नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
यह याचिका अभय किशोर सिंह, डॉ. अजय त्रिपाठी एवं अन्य अभ्यर्थियों की ओर से उनके अधिवक्ताओं द्वारा दायर की गई है।
100 प्रतिशत महिला आरक्षण को पहले ही किया जा चुका है निरस्त
यह मामला वर्ष 2021 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती नियम 2013 और विज्ञापन के कुछ प्रावधानों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 9 मार्च 2023 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने डेमोंस्ट्रेटर एवं सहायक प्राध्यापक पदों की सीधी भर्ती में 100 प्रतिशत महिला आरक्षण को संविधान के अनुच्छेद 16 के विपरीत मानते हुए संबंधित प्रावधानों को निरस्त कर दिया था।
संशोधित अधियाचन नहीं भेजने का आरोप
अवमानना याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद 15 मार्च 2023 को छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को संशोधित अधियाचन भेजने का अनुरोध किया था, ताकि नियमित भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। आरोप है कि विभाग ने न तो भर्ती नियमों में आवश्यक संशोधन किया और न ही संशोधित अधियाचन आयोग को भेजा।
संविदा भर्ती विज्ञापन पर भी उठा विवाद
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियमित भर्ती पूरी करने के बजाय चिकित्सा शिक्षा विभाग ने 22 जून 2026 को संविदा भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया, जिसे भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
सचिव के जवाब पर टिकी निगाहें
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से 15 मार्च 2023 के सीजीपीएससी पत्र का उल्लेख किया गया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि विभाग को हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी थी। अब सभी की निगाहें चिकित्सा शिक्षा विभाग के सचिव के जवाब और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।
नर्सिंग अभ्यर्थियों और यूनियन ने भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा हाईकोर्ट के आदेश का तत्काल पालन करने की मांग की है।


.jpg)
.jpg)


.jpg)
.jpg)






