Azaad bharat News/ Raigarh/ Chhattisgarh/- रायगढ़, 29 जुलाई। आज पूरे देश में श्रद्धा और आस्था के साथ गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जा रहा है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन तथा महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इसलिए इस पर्व को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, आश्रमों एवं विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थानों में गुरु वंदन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शिष्य अपने गुरुजनों का सम्मान कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। मंदिरों और धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना एवं भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।
भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। गुरु ही अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों से व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। इस दिन लोग अपने शिक्षकों, माता-पिता और जीवन में मार्गदर्शन देने वाले सभी व्यक्तियों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस अवसर पर अनेक श्रद्धालु दान-पुण्य, सत्संग और आध्यात्मिक साधना में भी भाग लेते हैं।
संदेश:
"गुरु केवल शिक्षा ही नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की सही राह भी दिखाते हैं। गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना भारतीय संस्कृति की अमूल्य परंपरा है।"







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