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सोशल मीडिया पर बनाया था संदिग्ध ग्रुप
एटीएस के अनुसार, आरोपी AQIS की विचारधारा से प्रभावित था और इस मकसद को आगे बढ़ाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहा था। जांच में सामने आया है कि नबील ने WhatsApp पर ‘ला गालिब-इल्लल्लाह’ नाम से एक ग्रुप बनाया था। इस ग्रुप में कथित तौर पर जिहाद, चाकू, केमिकल, प्लान, ट्रिप, पेन, जूस और प्रोजेक्ट जैसे कोड वर्ड इस्तेमाल किए जाते थे।
एटीएस का दावा है कि नबील ने ग्रुप में ‘जिहाद करने के 44 तरीके’ नाम की किताब शेयर की थी। इस किताब को AQIS के पूर्व प्रमुख आतंकी मौलाना आसिम उमर से जुड़ा बताया गया है। इसके अलावा ‘तीसरी जंग-ए-अजीम और दज्जाल’ नाम की किताब भी शेयर किए जाने की बात सामने आई है।
कई देशों के लोगों से संपर्क का दावा
एटीएस ने आरोपी के मोबाइल से ‘Flames of War’ समेत अन्य WhatsApp ग्रुपों से जुड़े होने की जानकारी मिलने का दावा किया है। इन ग्रुपों में बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब समेत कई देशों के लोगों के जुड़े होने की बात कही गई है।
विदेश जाकर ट्रेनिंग लेने की योजना
एटीएस के मुताबिक, आरोपी दूसरे देशों में जाकर आतंकी ट्रेनिंग लेने की योजना बना रहा था। जांच में पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश में ट्रेनिंग लेने और बम बनाने की योजना से जुड़ी बातचीत मिलने का दावा किया गया है। एटीएस ने बम बनाने की विधि और पोटैशियम नाइट्रेट हासिल करने से संबंधित बातचीत मिलने की भी बात कही है।
गजवा-ए-हिंद की योजना का आरोप
एटीएस के अनुसार, नबील अपने साथियों के साथ मिलकर भारत में गजवा-ए-हिंद की योजना बना रहा था। आरोपी के खिलाफ लखनऊ में मुकदमा दर्ज किया गया है। नबील को न्यायालय में पेश किया जा रहा है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.