Azaad bharat News/Raigarh/Chhattisgarh रायपुर। 15 अगस्त केवल भारत की आजादी का पर्व नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संविधान और नागरिक अधिकारों की समीक्षा का भी अवसर है। छत्तीसगढ़ के संदर्भ में इस स्वतंत्रता दिवस का राजनीतिक महत्व और बढ़ जाता है, क्योंकि राज्य की राजनीति में आदिवासी नेतृत्व, बस्तर का विकास, नक्सलवाद से मुक्ति, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं लगातार महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।
साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर बने छत्तीसगढ़ ने 25 वर्षों से अधिक का राजनीतिक सफर पूरा कर लिया है। इस दौरान राज्य की सत्ता मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच बदलती रही है। आज राज्य की राजनीति में भाजपा की सरकार है और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आदिवासी समुदाय से आने वाले राज्य के मुख्यमंत्री हैं।
स्वतंत्रता दिवस और बस्तर की बदलती तस्वीर
छत्तीसगढ़ में 15 अगस्त 2026 का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक-सामाजिक संदेश बस्तर से भी जुड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, बस्तर के 92 गांवों में इस स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया जाएगा, जहां लंबे समय तक माओवादी हिंसा के कारण राष्ट्रीय पर्वों का आयोजन चुनौतीपूर्ण रहा था। इनमें बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर के गांव शामिल हैं।
यह बदलाव केवल सुरक्षा व्यवस्था का विषय नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की जमीनी पहुंच का भी सवाल है। किसी दूरस्थ गांव में बिना भय के तिरंगा फहराना वहां के लोगों की मुख्यधारा में भागीदारी और राज्य की संस्थाओं पर भरोसे से भी जुड़ा है।
आदिवासी नेतृत्व बनी छत्तीसगढ़ की बड़ी राजनीतिक पहचान
छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी मतदाता लंबे समय से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं। राज्य की बड़ी आदिवासी आबादी के कारण वनाधिकार, लघु वनोपज, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सड़क जैसी सुविधाएं चुनावी राजनीति के महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के रजत महोत्सव के दौरान भी आदिवासी विरासत और विकास को प्रमुखता से रेखांकित किया था। उन्होंने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, PM-JANMAN और वन धन केंद्रों जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए आदिवासी क्षेत्रों के विकास पर जोर दिया था।
भाजपा-कांग्रेस की राजनीति से आगे विकास का सवाल
छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक मुकाबला आने वाले समय में भी महत्वपूर्ण रहेगा। लेकिन 15 अगस्त का अवसर दोनों दलों के सामने एक बड़ा सवाल भी रखता है—राजनीतिक वादों से आगे बढ़कर आम नागरिक तक विकास का लाभ कितनी तेजी से पहुंच रहा है?
किसानों के लिए कृषि और धान खरीदी, युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास, महिलाओं के लिए आर्थिक अवसर, आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा-स्वास्थ्य तथा ग्रामीण इलाकों में सड़क और बिजली जैसे मुद्दे राज्य की राजनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगे।
नक्सलवाद से मुक्ति के बाद नई चुनौती
बस्तर में सुरक्षा स्थिति में सुधार के साथ सरकार के सामने अब अगली चुनौती विकास की है। जिन इलाकों में कभी हिंसा के कारण स्कूल, सड़क, स्वास्थ्य केंद्र और प्रशासनिक संस्थाओं की पहुंच सीमित रही, वहां अब स्थायी विकास और रोजगार के अवसर पैदा करना महत्वपूर्ण होगा।
प्रधानमंत्री ने भी छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा से प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को विकास से जोड़ा था।
15 अगस्त का संदेश: सत्ता नहीं, जनता केंद्र में
छत्तीसगढ़ की राजनीतिक यात्रा को 15 अगस्त के संदर्भ में देखें तो राज्य के सामने अब केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है। असली सवाल यह है कि लोकतंत्र की पहुंच गांव के अंतिम व्यक्ति तक कितनी मजबूत हुई है।
तिरंगा तभी मजबूत अर्थ रखता है, जब उसके नीचे रहने वाले नागरिक को सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सम्मान और न्याय का भरोसा मिले।
इसलिए 15 अगस्त 2026 पर छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा यही होना चाहिए—आदिवासी क्षेत्रों से लेकर शहरों तक विकास की समान पहुंच और लोकतांत्रिक भागीदारी।
एक सवाल
छत्तीसगढ़ की राजनीति ने सत्ता के कई दौर देखे हैं। भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला आगे भी जारी रहेगा, लेकिन राज्य की जनता के लिए राजनीतिक दलों की सबसे बड़ी परीक्षा विकास के वादों को जमीन पर उतारने की होगी।
15 अगस्त का तिरंगा केवल आजादी की याद नहीं दिलाता, बल्कि यह भी पूछता है कि आजादी का लाभ समाज के आखिरी व्यक्ति तक कितना पहुंचा है। यही सवाल छत्तीसगढ़ की आने वाली राजनीति की दिशा तय कर सकता है।







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