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छत्तीसगढ़ में कार्रवाई के आधिकारिक आंकड़े
उच्च न्यायालय में राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार फरवरी 2025 तक:
ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी के 444 मामले दर्ज किए गए।
1,002 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
₹2.19 करोड़ से अधिक नकद और अन्य सामग्री जब्त की गई।
इसके बाद मार्च–अप्रैल 2025 में:
61 नए मामले दर्ज हुए।
141 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
करीब ₹49.98 लाख की नकदी जब्त की गई।
महादेव बेटिंग ऐप: कैसे बना राष्ट्रीय जांच का मामला?
महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया। जांच एजेंसियों के अनुसार यह नेटवर्क कथित रूप से भारत से बाहर संचालित होकर हवाला, फर्जी बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों के जरिए अवैध सट्टेबाजी का कारोबार करता था।
वर्ष 2022 से 2024 के बीच महादेव ऑनलाइन सट्टा ऐप से जुड़े 77 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। इनमें रायगढ़, रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और सूरजपुर सहित कई जिलों में केस दर्ज हुए।
EOW द्वारा दायर चार्जशीट में दावा किया गया कि लॉकडाउन के बाद यह नेटवर्क कथित रूप से हर महीने लगभग ₹450 करोड़ का अवैध कारोबार कर रहा था। वहीं ED ने इस मामले में ₹940 करोड़ से अधिक की अतिरिक्त संपत्तियां अटैच की हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार अब तक इस मामले में अटैच, जब्त या फ्रीज़ की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग ₹3,800 करोड़ तक पहुंच चुका है।
बेरोज़गार युवाओं,
कॉलेज छात्रों,
जल्दी पैसा कमाने की चाह रखने वालों,
और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं
को अपना निशाना बनाते हैं।
शुरुआत अक्सर ₹100 से ₹500 के छोटे दांव से होती है। शुरुआती जीत के बाद लोग अधिक पैसा लगाने लगते हैं और नुकसान की भरपाई के प्रयास में बड़ी रकम गंवा बैठते हैं।
*समाज पर पड़ रहा गंभीर असर
*ऑनलाइन सट्टे की लत से:
*बैंक खाते खाली हो रहे हैं।
*परिवार कर्ज़ में डूब रहे हैं।
*पति-पत्नी और परिवारों में विवाद बढ़ रहे हैं।
*पढ़ाई और करियर प्रभावित हो रहे हैं।
*मानसिक तनाव, अवसाद और चिंता बढ़ रही है।
*साइबर ठगी के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग तेजी से बढ़ा है। उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार 45 से 50 करोड़ से अधिक भारतीय किसी न किसी रूप में ऑनलाइन गेम खेलते हैं। हालांकि, सभी गेम अवैध नहीं हैं। समस्या उन प्लेटफॉर्मों से जुड़ी है जो अवैध रूप से पैसे लगवाकर सट्टेबाजी या जुआ संचालित करते हैं।
इतनी बड़ी कार्रवाई के बावजूद नए ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क कैसे सक्रिय हो जाते हैं? क्या केवल पुलिस कार्रवाई पर्याप्त है, या डिजिटल जागरूकता, कड़े कानून, वित्तीय निगरानी और समाज की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है?
ऑनलाइन गेमिंग और अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी एक जैसी नहीं हैं। मनोरंजन के लिए खेले जाने वाले वैध गेम और पैसे के लालच में चलने वाले अवैध बेटिंग प्लेटफॉर्म में अंतर समझना जरूरी है। आसान कमाई के झांसे से बचें, किसी भी प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले उसकी वैधता की जांच करें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को दें। जागरूक नागरिक ही ऐसे नेटवर्क को कमजोर कर सकते हैपूरे देश में बढ़ता नेटवर्क।