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जांच प्रतिवेदन के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने विद्यालय प्रबंधन को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया था, लेकिन निर्धारित समय सीमा में कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। इसके बाद विद्यालय की मान्यता समाप्त करने की अनुशंसा करते हुए मामला आगे की कार्रवाई के लिए प्रेषित कर दिया गया है।
विद्यालय द्वारा स्वयं के प्रकाशन की किताबें और कॉपियां सीधे विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को बेची जा रही थीं। पुस्तकों और कॉपियों पर विद्यालय का नाम मुद्रित पाया गया।
विद्यालय परिसर में ही गणवेश की बिक्री की जा रही थी, जो शिक्षा के अधिकार अधिनियम एवं शासन के निर्देशों के विपरीत है।
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लगभग 230 पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति योजना का लाभ नहीं दिलाया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी ने अपने प्रतिवेदन में कहा है कि विद्यालय द्वारा शासन की विभिन्न गाइडलाइन एवं शिक्षा के अधिकार अधिनियम की भावना का लगातार उल्लंघन किया गया है। विद्यालय की पुस्तकें एवं गणवेश स्थानीय बाजार या ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने के कारण अभिभावकों को मजबूरन विद्यालय से ही सामग्री खरीदनी पड़ रही थी।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में किसी भी निजी विद्यालय द्वारा नियमों की अनदेखी या विद्यार्थियों के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर के निर्देशानुसार सभी निजी विद्यालयों की नियमित मॉनिटरिंग जारी रहेगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।