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सक्ती: महिला के अंतिम संस्कार के लिए कीचड़ में कंधों पर शव ले जाने को मजबूर ग्रामीण, विकास के दावों पर उठे सवाल
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सक्ती: महिला के अंतिम संस्कार के लिए कीचड़ में कंधों पर शव ले जाने को मजबूर ग्रामीण, विकास के दावों पर उठे सवाल

Harshad Dewangan 05 July 2026
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आज़ाद भारत समाचार/सक्ती

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छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति उजागर कर दी है। जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर स्थित सोंठी ग्राम पंचायत में बारिश के बाद सड़क दलदल में तब्दील हो गई। ऐसे में एक महिला के निधन के बाद ग्रामीणों को उनका शव कंधों पर उठाकर घुटनों तक कीचड़ से गुजरते हुए श्मशान घाट तक ले जाना पड़ा।

कीचड़ भरे रास्ते से निकली अंतिम यात्रा

जानकारी के अनुसार, सोंठी गांव निवासी 60 वर्षीय कमलाबाई महंत का बीमारी के चलते निधन हो गया। शनिवार सुबह परिजन अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर निकले, लेकिन गांव से श्मशान घाट तक जाने वाली कच्ची सड़क बारिश के कारण पूरी तरह कीचड़ और दलदल में बदल चुकी थी। वाहन तो दूर, पैदल चलना भी बेहद मुश्किल था। ऐसे में ग्रामीणों ने मानवता का परिचय देते हुए शव को कंधों पर उठाया और लगभग एक किलोमीटर तक पैदल चलकर श्मशान घाट पहुंचे।

बोराई नदी पार कर पहुंचना पड़ा श्मशान

ग्रामीणों की परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई। रास्ते में बोराई नदी का जलस्तर भी बारिश के कारण बढ़ा हुआ था, जिसे पार कर अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ा। इससे ग्रामीणों को भारी जोखिम उठाना पड़ा।

हर बारिश में बनते हैं ऐसे हालात

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में हर वर्ष यही स्थिति बनती है। सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे मरीजों, स्कूली बच्चों और आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से पक्की सड़क की मांग की गई, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका।

व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी को उजागर करती है। विकास के दावों के बीच अंतिम यात्रा का यह दृश्य प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।


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