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प्रसिद्ध गायक पद्मश्री कैलास खेर ने आज एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता मैं कहा,चक्रधर समारोह एक ऐसा समारोह है जो शास्त्रीय संगीत का प्रतिनिधित्व निभाता है


Chakradhar samaroh 2024-25 06 September 2025
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Azaad-bharat News//छत्तीसगढ़//रायगढ़ (6 सितंबर)। देने वाला भी राम है और दिलाने वाला भी राम, जो जगता है वही जगाता है।जो जोड़ता है वही जोड़ता है शास्त्रीय संगीत भारत की विश्व को महान देन है। चक्रधर समारोह एक ऐसा समारोह है जो शास्त्रीय संगीत का प्रतिनिधित्व निभाता है। यहां आना ही उनके लिए बड़ी बात है। यहां के मुख्यमंत्री विष्णुदेव भी काफी भोले हैं और यह धरती भी भोले लोगों की है, यह भोले की ही नगरी है क्योंकि सहजता ज्यादा जगह होती नहीं, इस दुनिया में अब ज्यादा जगह होशियार ही बची है लेकिन कहीं-कहीं जब सहजता दिखती है तो बड़ा प्यारा लगता है। 40 वें चक्रधर समारोह के समापन अवसर पर कल अपनी प्रस्तुति देने के बाद उक्त बातें प्रसिद्ध गायक पद्मश्री कैलास खेर ने आज एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान कही । प्रख्यात बॉलीवुड गायक कैलाश खेर ने कहा कि शास़्त्रीय संगीत धरती पर लगभग 6 सौ 7 सौ बरस पहले आया। इससे पहले गांवों में गलियों में और मोहल्लों में लोक संगीत हुआ करता था जो हमारी असली पहचान है वही हमारी जड़े हैं और वहीं से शास्त्रीय संगीत निकला है। फोक से ही शास्त्रीय संगीत निकला है। अब चूंकि समय बदल रहा है अब फोक सांग की ओर फिर से लोग जुड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार संगीत और लोक कला को जीवित रखने के लिए बहुत कुछ कर रही है मगर अब सरोकार की जरूरत है। यानी इसके लिए आमजनों को भी आगे आना पड़ेगा। सरकार और सरोकार जब आपस में जुड़ जायें तो संगीत एक नई बुलंदियों तक पहुंचेगा। हमारी संस्कृति, कला और परंपरा को बचाने के लिए यह जरूरी है। यह हम सबका कर्तव्य है। सरकार और सरोकार के समन्वय से देश भी संवरेगा।

उन्होंने कहा कि समय के साथ ही संगीत में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। इसके लिए हमें संतुलन बिठाना पड़ेगा क्योंकि हम ही नई पीढ़ी को कान्वेंट की ओर ढकेल रहे हैं। भारत में 3 सौ साल पहले कान्वेंट संस्कृति थी ही नहीं, उससे पहले अपनी ही संस्कृति, गुरूकुल और आश्रम थे। इसलिए संस्कृति में हमें ही बैलेंस बनाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वे नई पीढ़ी को संगीत की इस कला से जोड़ने के लिए एक संस्था भी कैलासा नाम से चलाते हैं और वहां नये गायकों को आगे बढ़ाते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब आप वक्त की थपेड़ों से गुजरते हैं तो आपके अनुभव ही आपके आइडियल बनते हैं। अनुभव ही अपने आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है।

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