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रायगढ़ में सायबर ठगी के दर्ज किए गए एक अहम मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी   की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर  दिया   ।
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रायगढ़ में सायबर ठगी के दर्ज किए गए एक अहम मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया ।

Azaad Bharat Desk 07 April 2026
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रायगढ़, 06 अप्रैल 2026।

सिटी कोतवाली, रायगढ़ में सायबर ठगी के दर्ज किए गए एक अहम मामले में आरोपी शिवाजी चन्द्रा की जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी शिवाजी चन्द्रा वल्द लक्ष्मी प्रसाद चन्द्रा की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिवाजी चन्द्रा को प्रमुख आरोपी मानते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया था।

सिटी कोतवाली, रायगढ़ में शिवाजी चन्द्रा, अनिश अग्रवाल, शोएब खान, गौस खान, चांदनी लहरे, जितेश चन्द्रा के विरूद्ध अपराध क्रमांक-446/2025, अंतर्गत धारा 317 (2), 317 (4), 317 (5) एवं 111 बी.एन.एस. दर्ज कर दिनांक 02/09/2025 को शिवाजी चन्द्रा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और यह आरोप लगाया गया था कि, आरोपीगण ने सायबर ठगी करते हुए कर्नाटका बैंक, रायगढ़ की शाखा के एकाउंट नंबर-661252400032701 में अनेकों अपराधपूर्ण ट्रांजेक्शन किया हैं तथा दिनांक 01/06/2024 से दिनांक 14/08/2025 तक 06 बैंक एकाउंट से भारी भरकम रकम का अपराधपूर्ण ट्रांसफर किया गया है तथा यह ट्रांजेक्शन गरीब व्यक्तियों को बैंक से लोन दिलाने के नाम पर उनसे बैंक एकाउंट खुलवा कर उनके एकाउंट का इस्तेमाल सायबर ठगी के लिए किया गया है। उपरोक्त अपराध में शिवाजी चन्द्रा को गिरफ्तार करने के बाद शेष आरोपीगण अनिश अग्रवाल, शोएब खान, गौस खान, चांदनी लहरे, जितेश चन्द्रा को फरार दर्शाते हुए चालान पेश कर दिया गया एवं उक्त आरोपियों को अभी तक गिरफ्तार नही किया गया है।

गिरफ्तारी बाद शिवाजी चन्द्रा ने जमानत हेतु सत्र न्यायालय, रायगढ़ में जमानत याचिका पेश किया एवं सत्र न्यायालय, रायगढ़ से जमानत आवेदन पत्र निरस्त होने के बाद हाईकोर्ट, बिलासपुर में जमानत के लिए एम.सी.आर.सी. नंबर-8694/2025 पेश किया, जिसकी सुनवाई पश्चात् छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उसे अपराध का सूत्रधार एवं मुख्य आरोपी होना दर्शाते हुए उसकी जमानत याचिका दिनांक 26/11/2025 को रद्द कर दिया।

शिवाजी चन्द्रा की जमानत याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से खारिज होने के पश्चात् मिश्रा चेम्बर, रायगढ़ के सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा-आशीष कुमार मिश्रा द्वारा छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के विरूद्ध सुप्रीम कोर्ट में शिवाजी चन्द्रा की ओर से इस आधार पर अपील दाखिल कराई गई कि, न तो शिवाजी चन्द्रा का नाम F.I.R. में दर्ज हैं, न ही शिवाजी चन्द्रा के एकाउंट में कोई रकम ट्रांसफर हुई हैं, जबकि इस प्रकरण के वे सभी आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिनका नाम F.I.R. में दर्ज हैं एवं जिनके एकाउंट में रकम ट्रांसफर हुई है एवं जिन्होनें फर्जी सिम बनाकर सायबर ठगी के अपराध को अंजाम दिया है परन्तु इन सभी बातों को अनदेखा करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिवाजी चन्द्रा को प्रमुख आरोपी ठहराते हुए उसकी जमानत याचिका निरस्त कर दिया है, जबकि पूरे प्रकरण में उसकी प्रत्यक्ष संलिप्तता की कोई साक्ष्य नही हैं, बल्कि उसे एक आरोपी के मेमोरेण्डम बयान के आधार पर आरोपी मानकर गिरफ्तार कर लिया गया है।

मिश्रा चेम्बर द्वारा सुप्रीम कोर्ट में आरोपी शिवाजी चन्द्रा के लिए दाखिल कराई गई उक्त अपील में मिश्रा चेम्बर के एसोसिएट पल्लव मोंगिया, सुश्री कशिश लालवानी, सुश्री इशिका नेओगी और सुश्री दिव्या त्रिपाठी द्वारा पैरवी की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद आरोपी शिवाजी का नाम F.I.R. में न होने, उसके एकाउंट में रकम ट्रांसफर न होने एवं उसे मात्र मेमोरेण्डम के आधार पर आरोपी बनाने के तर्क को सही होना पाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया एवं आरोपी शिवाजी चन्द्रा को जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मिश्रा चेम्बर, रायगढ़ के अधिवक्ता अशोक कुमार मिश्रा-आशीष कुमार मिश्रा ने कहा कि, आरोपी शिवाजी चन्द्रा के विरूद्ध अपराध की ठोस साक्ष्य न होने के बावजूद उसे न्याय पाने के लिए दिल्ली तक की दौड़ लगाते हुए शीर्ष अदालत तक जाना पड़ा परन्तु सुप्रीम कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट हो गया हैं कि, न्याय की लड़ाई एक न एक दिन जरूर सार्थक होती हैं, उन्हे उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट का उक्त आदेश छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सहित प्रदेश की सभी अदालतों के लिए पथ प्रदर्शक साबित होगा एवं प्रथम दृष्टया साक्ष्य न होते हुए भी केवल पुलिस द्वारा लगाई गई धारा के आधार पर जेल में निरूद्ध विचाराधीन बंदियों के जमानत प्रकरणों में सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अवश्य ही प्रदेश की अदालतों के लिए प्रासंगिक साबित होगा।

इस मामले का आश्चर्यजनक पहलू यह भी है कि, सायबर ठगी के इस अपराध में नामजद और प्रभावशाली आरोपी अनिश अग्रवाल, शोएब खान, गौस खान, चांदनी लहरे, जितेश चन्द्रा को गिरफ्तार करने का कोई प्रयास पुलिस द्वारा नही किया जा रहा हैं, जबकि आरोपी शिवाजी चन्द्रा की माता उक्त आरोपियों की गिरफ्तारी की गुहार रायगढ़ के एस.पी. सहित पुलिस हेडक्वार्टर, रायपुर तक लगा चुकी है, लेकिन पुलिस ने इस मामले में कमजोर तबके के केवल दो लोगो को गिरफ्तार कर एवं इन्ही दो व्यक्तियों के विरूद्ध न्यायालय में चालान पेश करके प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्यवाही से अपना पल्ला झाड़ लिया है।

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