Azaad-bharat News//छत्तीसगढ़//धरमजयगढ़, रायगढ़। मेसर्स अंबुजा सीमेंट्स लिमिटेड की प्रस्तावित पुरूंगा कोल माइंस जनसुनवाई को निरस्त करने की मांग को लेकर आज धरमजयगढ़ क्षेत्र के तीन ग्राम—पुरूंगा, तेंदुमुड़ी और साम्हरसिंगा—के हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिला रायगढ़ स्थित कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया।बता दें, हाथों में बैनर और तख्तियां लिए ग्रामीणों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए प्रशासन से स्पष्ट कहा- पेसा कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं कलेक्टर कार्यालय परिसर में किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल की भारी तैनाती की गई थी। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण चल रही है, लेकिन ग्रामीणों के चेहरे पर आक्रोश साफ झलक रहा था।

लेकिन वहीं इस वक्त की ताजा जानकारी के अनुसार, प्रदर्शनकारी अब कलेक्टर कार्यालय के सामने ही सड़क पर रात बिताने का संकल्प ले चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक जनसुनवाई को निरस्त करने का आदेश नहीं मिलता, वे “टस से मस” नहीं होंगे। और वहीं रात के दृश्यों में सैकड़ों ग्रामीण खुले आसमान के नीचे डटे हुए दिखाई दिए—यह उनके संकल्प और संघर्ष का प्रमाण है।
ग्रामीणों ने बताया कि बीते 22 अक्टूबर को भी वे कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे,और जनसुनवाई निरस्त करने की मांग रखी थी। तब उन्हें बताया गया कि पंचायत प्रस्ताव प्रशासन को भेजा जा चुका है। किंतु जब ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय से उस प्रस्ताव की प्रति मांग की, तो उन्हें “उपलब्ध नहीं” कहा गया। अब, विरोधाभासी रूप से, जिला प्रशासन का दावा है कि ऐसा कोई पंचायत प्रस्ताव मौजूद ही नहीं है।वहीं इस विरोधाभास ने ग्रामीणों के बीच भ्रम और असंतोष को और गहरा कर दिया है। वहीं ग्रामीणों का कहना है, कि कंपनी द्वारा गुमराह किए जाने के साथ-साथ अब प्रशासन भी पारदर्शिता से दूर होता जा रहा है, जिससे किसानों और ग्रामीणों के बीच विश्वास की खाई और चौड़ी होती जा रही है।और वहीं अभी ताजा जानकारी अनुसार कलेक्टर कार्यालय के बाहर जनसैलाब डटा हुआ है, और प्रदर्शन स्थल पर पुलिस बल की कड़ी निगरानी बनी हुई है।अब समूचे रायगढ़ जिले की निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस आंदोलन को किस प्रकार सुलझाता है,क्या ग्रामीणों की मांगें सुनी जाएंगी, या फिर यह संघर्ष और लंबा खिंचने वाला है।
देर रात तक ग्रामीण आसमान के नीचे सड़क पर बैठे हुए हैं अपने माँग को ले कर, आज ये हमारे देश का दुर्भाग्य है कि एक तरफ सरकार जल, जंगल बचाने की बात करती है वही प्रगति प्रेमी होने का दिखावा भी करती हैं और पंजीपतियो के इशारे पर किसी की भी हद तक जा सकती है .अब देखना यह होगा कि प्रशासन किस दिशा में निर्णय करती है




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