Azaad-bharat News/ छत्तीसगढ -रायगढ़ के चक्रधर समारोह का मंच पर आज अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त और सर्वोच्च सांगीतिक सम्मान के विजेता बांसुरी वादक श्री राकेश चौरसिया की प्रस्तुति हुई। उनकी मधुर मुरली से निकले अद्भुत और अलौकिक सुरों ने पूरे समारोह में एक रूहानी मिठास घोल दी। राग हेमावती से शुरू हुआ धुनों का सुरीला सफर तबले पर श्री रूपक भट्टाचार्य की संगत के साथ श्रोताओं को बांसुरी के आरोह-अवरोह की मधुर सांगीतिक यात्रा पर ले कर गया। रघुपति राघव राजा राम, वैष्णव जन तो तेने कहिए जैसे भजनों को उन्होंने अपनी बांसुरी के सुरों से सजा के प्रस्तुत किया।
राकेश चौरसिया पद्मविभूषण हरिप्रसाद चौरसिया के भतीजे और शिष्य है और अपनी अद्वितीय कला और संगीत के प्रति समर्पण से भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत में एक विशेष स्थान बना लिया है। राकेश चौरसिया का बांसुरी वादन न केवल शास्त्रीय धुनों को जीवंत करता है, बल्कि इसमें समकालीन और प्रयोगात्मक संगीत तत्वों का भी समावेश होता है। उनके वादन की विशिष्टता उनकी तकनीकी महारत और भावनात्मक अभिव्यक्ति में निहित है, जो दर्शकों को एक संगीत यात्रा पर ले जाती है। चक्रधर समारोह में उन्होंने न केवल पारंपरिक रागों का प्रस्तुतिकरण किया, बल्कि नए प्रयोगों और समकालीन धुनों को भी बांसुरी के माध्यम से जीवंत किया। राकेश चौरसिया का संगीत सिर्फ सुनने में सुखद नहीं, बल्कि यह संगीत प्रेमियों को एक गहन मानसिक और भावनात्मक अनुभव भी प्रदान करता है।














