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बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के रहने वाले राधाकांत शुक्ल के बेटे आदर्श शुक्ल ने बिना कोचिंग किये पहले ही प्रयास में यूपीएससी क्लीयर किया। आदर्श शुक्ल को मिली इस कामयाबी ने यह साबित कर दिया कि मन में यदि लगन हो और लक्ष्य के प्रति एकाग्रता हो तो कोई भी बाधा उसे रोक नहीं सकती है।
आइए जानते हैं आदर्श शुक्ल के बारे में
अब जानते हैं राधाकांत शुक्ल के बारे में
राधाकांत शुक्ल मूलत: बाराबंकी जिले के मडऩा गांव के रहने वाल हैं। मडऩा बाढ़ प्रभावित इलाका है। यहां से करीब 20 वर्ष पहले वह पत्नी गीता शुक्ला के साथ बाराबंकी मुख्यालय आ गये थे और यहां किराये के मकान में रहा करते थे। वर्तमान में वह एक प्राइवेट फर्म में जीएसटी के एकाउंटेंट हैं। अब उन्होंने बाराबंकी शहर के मयूर विहार कालोनी में अपना मकान बनवा लिया है। राधाकांत के दो बच्चे हैं। बेटी स्नेहा और बेटा आदर्श।
बेटी स्नेहा ने ला की पढ़ाई पूरी की है। एलएलएम की डिग्री हासिल कर वह वकालत कर रही है। बेटे आदर्श शुक्ल ने आईपीएस बनकर राधाकांत शुक्ल के जीवन को कृतार्थ कर दिया। राधाकांत कहते हैं बेटे ने उन्हें जो खुशी दी है वह अकल्पनीय है।
युवा आदर्श शुक्ल के जीवन से ले प्रेरणा
आज आईएएस आईपीएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने के लिए कोचिंग कर पाना कितना महंगा हो गया है। सामान्य परिवार के लिए यह बस की बात नहीं है। युवाओं के मन में एक बात घर कर जाती है कि बगैर कोचिंग के वह इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता नहीं अर्जित कर सकेंगे। पर उनके सामने अब आदर्श शुक्ल एक उदाहरण है। आदर्श ने पहले ही प्रयास में बगैर कोचिंग के यूपीएससी -2020 को 149वीं रैंक लाकर यह साबित कर दिया कि बगैर कोचिंग के भी यूपीएससी कै्रक किया जा सकता है।
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