छत्तीसगढ़

शिवराज सरकार में बड़ा घोटाला, तरीका जानकर रह जाएंगे हैरान! CM के पास है मंत्रालय



इतना ही नहीं, टीएचआर उत्पादन प्लांट्स ने टीएचआर उत्पादन को उनकी रेटेड और परमिटेड क्षमता से परे बताया। टीएचआर उत्पादन की तुलना में फर्जी उत्पादन 58 करोड़ था। बड़ी, धार, मंडला, रीवा, सागर और शिवपुरी में छह संयंत्रों ने चालान जारी करने की तिथि पर टीएचआर स्टॉक की अनुपलब्धता के बावजूद 4.95 करोड़ की लागत से 821.558 मीट्रिक टन टीएचआर की आपूर्ति की। आठ जिलों में बाल विकास परियोजना अधिकारियों (CDPO) ने पेड़-पौधों से 97,656.3816 मीट्रिक टन टीएचआर प्राप्त किया, हालांकि उन्होंने आंगनवाड़ियों को केवल 86,377.5173 मीट्रिक टन टीएचआर का परिवहन किया। शेष टीएचआर 10,176.9733 टन, जिसकी लागत 62.72 करोड़ है, इसका न तो परिवहन किया गया, न ही गोदाम में उपलब्ध था। यह स्पष्ट रूप से स्टॉक के दुरुपयोग को दर्शाता है।

इतना ही नहीं इसमें मानकों के नाम पर भी फर्जीवाड़ा किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत तैयार किए टीएचआर के नमूने को राज्य के बाहर गुठवत्ता की जांच के लिए स्वतंत्र प्रयोगशालाओं में भेजने का प्रवाधान है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यहां तक की 2018-21 के दौरान आंगनबड़ी केंद्रों का निरीक्षण तक नहीं किया गया।



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