छत्तीसगढ़

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को दी जमानत, योगी सरकार ये कहकर कर रही थी जमानत का विरोध



सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को जमानत दे दी, जिन्हें 5 अक्टूबर, 2020 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया था।

फोटो: सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन को जमानत दे दी, जिन्हें 5 अक्टूबर, 2020 को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया था। हाथरस में दलित लड़की से गैंगरेप-मर्डर मामले में सिद्दीक कप्पन घटनास्थल पर जा रहे थे। इसी दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया।

प्रधान न्यायाधीश यू.यू. ललित ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। पीठ ने कहा, हर व्यक्ति को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है.. वह यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि पीड़िता को न्याय चाहिए.. क्या यह कानून की नजर में अपराध होगा?

यूपी सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने कहा कि 5 अक्टूबर को, उन्होंने दंगा भड़काने के लिए हाथरस जाने का फैसला किया था। पीठ ने आगे कहा कि 2011 में भी इंडिया गेट पर निर्भया के लिए विरोध प्रदर्शन हुए थे। बेंच में जस्टिस एस. रवींद्र भट और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने कहा, कभी-कभी बदलाव लाने के लिए विरोध की जरूरत होती है। आप जानते हैं कि उसके बाद कानूनों में बदलाव आया था। ये विरोध प्रदर्शन हैं।

राज्य सरकार ने एक लिखित जवाब में कहा, जांच से पता चला है कि याचिकाकर्ता (कप्पन) सह-आरोपियों के साथ धार्मिक भावना को भड़काने की बड़ी साजिश का हिस्सा है। इसने आगे दावा किया कि कप्पन के लैपटॉप से और दिल्ली में उनके किराए के घर से बरामद दस्तावेज यह साबित करते हैं कि उनके पीएफआई से गहरे संबंध हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कप्पन की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया।

आईएएनएस के इनपुट के साथ




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