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पेलमा गांव के पंचायत भवन का बद्तर हालात , न बिजली व्यवस्था न ही पेयजल जिम्मेदारी से भाग रहे सरपंच सचिव


धरमजयगढ़:– धरमजयगढ़ विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ऐसे कई ग्राम पंचायत है, जहां पर पंचायत भवन अपने हालात पर रो रहा है।भवन के देखभाल करने वाले भी अपनी जिम्मेदारी से भागते नजर आ रहे हैं।
आपको बता दें, ऐसे ही एक मामला देखने को मिला , जहां पर ग्राम पंचायत भवन का हालात इतनी खराब है,जिसे देखकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है, कि भवनों की इस बुरी स्थिति का जिम्मेदार कौन है।हम बात कर रहे हैं। क्षेत्र का ग्राम पंचायत पेलमा का जहां पर ग्राम पंचायत भवन में इतनी भीषण गर्मी में न तो लाईट व्यवस्था ,न इतनी गर्मी में पंखा का जहां पर पंचायत में आये लोग गमछे से हवा देकर गर्मी भगाते दिखे।

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पंचायत भवन में ही तेंदुपत्ता केवाईसी के लिए लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कराया जा रहा है, लेकिन भवन में बिजली व्यवस्था नहीं होने के वजह से सीएसपी संचालक अंतराम चौहान को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आगे अंतराम चौहान का कहना है, कि पंचायत भवन में न बिजली का व्यवस्था है,न पेयजल की। जिससे लोगों का जल्दी जल्दी केवाईसी करने में दिक्कतें आ रही है। बिजली के लिए स्वयं की बैटरी इन्वर्टर लगा कर लोगों की सेवा कर रहे हैं।
आगे उन्होंने कहा, कि बिजली व्यवस्था एवं पेयजल उपलब्ध कराने को लेकर सरपंच सचिव को उनके द्वारा कई बार सुचित किया गया है। और इतना ही नहीं बरसात में भवन का छत पर से पानी टपकता है। जिससे लोगों को पंचायत आने पर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। भवन छत पर वाटरप्रुफिंग करवाने के बजाय तिरपाल लगाया हुआ है। पीडीएस दुकान संचालक जयकरण राठिया ने बताया कि राशन वितरण करने के लिए पीडीएस भवन भी नहीं है,जो फिलहाल पंचायत भवन में संचालित कर रहा हो रहा है। जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है,चाहे गर्मी का सीजन हो या फिर बरसात का मौसम। इस संबंध में सरपंच मोतीराम बैगा से जानकारी लिया गया,तो उन्होंने कहा कि भवन जर्जर अवस्था को लेकर विभागीय उच्च अधिकारियों को सुचित कर दिया गया है कहते हुए अपनी पल्ला झाड़ते नजर आए।
लेकिन सवाल यह उठता है , कि आखिर पंचायत प्रतिनिधियों एवं पंचायत कर्मचारी का या विभागीय उच्च अधिकारी चुप्पी साधे क्यों बैठे हैं। सीधे तौर पर कहें तो, भवनों का हालात के जिम्मेदार ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव को ही जाता है ।अब देखना यह होगा, कि आखिर ऐसे जर्जर अवस्था भवन का सुधार कब तक हो सकती है।