छत्तीसगढ़

यूपी के शिक्षा जगत के घोटालों का जिन्न आखिर बोतल से निकला बाहर, जीरो टॉलरेंस सरकार पर दिखे गहरे दाग



छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के कुलपति प्रो. विनय पाठक जुगाड़ के दम पर लगातार 13 वर्षों तक विश्वविद्यालयों के शीर्ष पद पर बने रहें। इस दरम्यान वह यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान के आठ विश्वविद्यालयों में कुलपति बनें। हैरानी यह कि इस बीच अलग-अलग सत्ताधारी दलों के पांच मुख्यमंत्री और तीन गवर्नर का कार्यकाल गुजरा, लेकिन प्रो. पाठक की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा, वह सबकी पसंद बने रहे। अब जब उनके भ्रष्टाचार की परतें खुलनी शुरु हो गयी हैं, तो जेहन में गंभीर सवाल तैरने लगे हैं कि क्या प्रो. पाठक के उपलब्धियों की वजह उनकी योग्यता है? या उनके पीछे खड़े भ्रष्टों के काकस का प्रभाव? या फिर राजनीतिक व्यवस्था का भ्रष्ट प्रबंधन (जुगाड़ तंत्र)?

हमारी पड़ताल में पता चला है कि 25 नवम्बर 2009 को जब विनय पाठक पहली बार उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी के कुलपति बने थे। उस समय उनके दिए गए बायोडाटा और चौथी बार अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय (एकेटीयू) में कुलपति बनने के लिए दिए गए डिटेल में काफी अंतर है। आरटीआई के तहत मिली जानकारी इसकी पुष्टि करती है। ध्यान देने की बात यह है कि जब 2015 में एकेटीयू में उन्हें कुलपति बनाया गया था। उस समय प्रदेश में अखिलेश सरकार थी और तत्कालीन राज्यपाल रामनाईक ने एकेटीयू में कुलपति चयन की सर्च कमेटी का अध्यक्ष शिक्षाविद पदमश्री संजय धाण्डे को बनाया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि धाण्डे खुद कई जर्नल्स के प्रकाशन में पाठक के साथ सह लेखक थे। उन्होंने ही प्रो. पाठक की दावेदारी को आगे बढाया। ये घटनाक्रम प्रो. पाठक के योग्यता और उनके जुगाड़ तंत्र की असलियत उजागर करने के लिए पर्याप्त है, साथ ही उनके पीछे खड़े काकस की तरफ इशारा भी कर रहे हैं।



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