छत्तीसगढ़

घड़ी बनाने वाली कंपनी ओरेवा को दे दिया गया था ब्रिज ऑपरेट करने का ठेका, बिना एनओसी 4 दिन पहले खोला गया था पुल



गुजरात के मोरबी में केबिल ब्रिज टूटने से हुए हादसे में मरने वालों की संख्या 150 के करीब पहुंच गई है और तमाम लोग जख्मी हैं। लेकिन सवाल इस बात पर उठ रहे हैं कि इस पुल के रखरखाव और ऑपरेट करने का  जिम्मा जिस प्राइवेट कंपनी के पास था उसे से कामों का कोई अनुभव ही नहीं हैं।

जानकारी से सामने आया है कि इस पुल के रखरखाव और ऑपरेट करने का ठेका 15 साल की लीज पर इसी साल मार्च में अहमदाबाद के ओरेवा ग्रुप को दिया गया था। इस ग्रुप के पास पुलों को रखरखाव का कोई अनुभव नहीं है। ओरेवा ग्रुप की पहचान ‘अजंता’ ब्रांड नाम से वॉल क्लॉक बनाने की है। साथ ही यह कंपनी कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बनाती है।

कंपनी का प्रोफाइल बताता है कि, “कंपनी ने क्लॉक बनाने वाली विश्व की सबसे बड़ी कंपनी होने का गौरव हासिल किया है और अब यह कंपनी लाइटिंग उत्पाद, ई-बाइक (बैटरी से चलने वाली बाइक), घरों में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रिकल उपकरण, टेलीफोन, कैलकुलेटर, एलईडी टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाती है।” इस पूरी जानकारी में कंपनी ने कहीं न तो जिक्र किया है और न ही दावा किया है कि इसे पुलों के रखरखाव या उन्हें ऑपरेट करने का कोई अनुभव है।

इस कंपनी को मार्च 2022 में जब इस पुल का ठेका दिया गया था तो तभी सवाल उठे थे। लेकिन कथित तौर पर राजनीतिक रसूखों के आधार पर कंपनी को ठेका दे दिया गया। इससे पहले तक इस पुल के रखरखाव और ऑपरेट करने की जिम्मेदारी मोरबी म्यूनिसिपल कार्पोरेशन की थी। गुजरात के एक कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि “इस कंपनी को सिर्फ इसलिए यह ठेका मिला क्योंकि कंपनी के मालिकों के बीजेपी नेताओं के साथ रिश्ते हैं।”

दुर्घटना के बाद मोरबी नगर पालिका ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है और सारा दोष ओरेवा कंपनी के सिर मढ़ दिया है। नगर पालिका के प्रमुख संदीप सिंह ने कहा है कि इस पुल को फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि “इस पुल पर एक बार में सिर्फ 20-25 लोगों को ही जाने की अनुमति दी जाती थी, लेकिन ओरेवा ग्रुप की लापरवाही के चलते पुल पर एक साथ 400-500 लोगों को जाने दिया गया, नतीजतन इतनी बड़ी दुर्घटना हो गई।”

इस मामले पर गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा, “इस मामले में सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं। आखिर नगर पालिका अब क्यों पल्ला झाड़ रही है, पहले क्यों नहीं उन्होंने इस पुल को चेक किया?” उन्होंने कहा, “इस मामले में गुजरात सरकार के बड़े लोग शामिल हैं। आप अंदाजा लगा लीजिए कि घड़ी बनाने वाली एक कंपनी को पुल चलाने का ठेका दे दिया गया।” उन्होंने भूपेंद्र पटेल सरकार को आपराधिक लापरवाही का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि, “मुख्यमंत्री के ही पास शहरी विकास मंत्रालय है। उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए क्योंकि उन्हें पता था कि घड़ी बनाने वाली कंपनी के पास इस काम का कोई अनुभव नहीं है।”

दोशी ने कहा कि सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए इस पुल को खोल दिया गया था। उन्होंने कहा, “विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में सिर्फ विकास दिखाने की कवायद में ओरेवा कंपनी को पुल खोलने के लिए कह दिया गया। और अब एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।”

इस बीच घटना को लेकर एफआईआर तो दर्ज हुई है लेकिन इसमें न तो पुल के रखरखाव वाली कंपनी या एजेंसी और न ही किसी नगरपालिका अधिकारी का नाम है।



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