छत्तीसगढ़

हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का सवाल- क्या धर्म का अधिकार निर्धारित ड्रेस वाले स्कूल में भी हो सकता है लागू?



सुनवाई के दौरान आई दलीलों पर पीठ ने कहा कि अगर कर्नाटक शिक्षा अधिनियम ड्रेस कोड निर्धारित करने की अनुमति नहीं देता है, तो सवाल यह है कि क्या अधिनियम ड्रेस कोड को प्रतिबंधित कर सकता है। साथ ही पीठ ने पूछा, ‘क्या छात्राएं मिनी, मिडी या जो पोशाक वो चाहें, पहनकर आ सकती से यह सवाल किया जो दलील रख रहे थे. इस तर्क पर कि हिजाब प्रतिबंध से महिलाएं शिक्षा से वंचित रह सकती हैं, पीठ ने कहा कि राज्य यह नहीं कह रहा है कि वह किसी भी अधिकार से इनकार कर रहा है। पीठ ने कहा, ‘राज्य यह कह रहा है कि आप उस यूनिफॉर्म में आएं जो विद्यार्थियों के लिए निर्धारित है….’हैं?’

कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने जोर दिया कि इस मामले में सर्वोच्च अदालत का फैसला समाज के एक बड़े वर्ग की शिक्षा पर असर डालेगा। उन्होंने कर्नाटक शिक्षा कानून, 1983 के प्रावधानों का भी उल्लेख किया। हेगड़े ने कहा कि राज्य की कार्यकारी शक्ति मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकती है। इस तर्क पर कि हिजाब प्रतिबंध से महिलाएं शिक्षा से वंचित रह सकती हैं, पीठ ने कहा कि राज्य यह नहीं कह रहा है कि वह किसी भी अधिकार से इनकार कर रहा है। राज्य यह कह रहा है कि आप उस यूनिफॉर्म में आएं जो विद्यार्थियों के लिए निर्धारित है।



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