छत्तीसगढ़

नौकरी और एडमिशन में 10% EWS कोटे पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आज, जानें पूरा मामला



मामले में मैराथन सुनवाई लगभग सात दिनों तक चली, जहां याचिकाकर्ताओं और (तत्कालीन) अटॉर्नी जनरल के.के. वेणुगोपाल और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ईडब्ल्यूएस कोटे का बचाव किया।

याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले कानूनी विद्वान डॉ. जी मोहन गोपाल ने तर्क दिया कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़ा वर्ग एक श्रेणी है, जो सभी श्रेणियों को पिछड़े वर्गों के रूप में एकजुट करती है- सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन के आधार पर। उन्होंने तर्क दिया कि वर्गों का विभाजन, आरक्षण देने के लिए एक पूवार्पेक्षा के रूप में आगे बढ़ने की गुणवत्ता संविधान के मूल ढांचे का विरोध करती है।

इससे पहले गोपाल ने तर्क दिया था कि 103वां संशोधन संविधान के साथ धोखा है और जमीनी हकीकत यह है कि यह देश को जाति के आधार पर बांट रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संशोधन सामाजिक न्याय की संवैधानिक ²ष्टि पर हमला है और उनके राज्य में, जो केरल है, उन्हें यह कहते हुए खुशी नहीं है कि सरकार ने ईडब्ल्यूएस के लिए एक आदेश जारी किया और शीर्षक ‘जाति’ था और वह सभी देश की सबसे विशेषाधिकार प्राप्त जातियां थी।

वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने तर्क दिया कि अनुच्छेद 15(4) और 16(4) आरक्षण प्रदान करने के प्रावधानों को सक्षम कर रहा हैं जो सदियों से चले आ रहे सामाजिक भेदभाव को दूर करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए सकारात्मक कार्रवाई हैं। उन्होंने कहा कि 103वां संशोधन अनुच्छेद 15(4) और 16(4) द्वारा हासिल की जाने वाली वास्तविक समानता को समाप्त और नष्ट कर देता है और समाज में एससी/एसटी/ओबीसी को पूर्व-संविधान स्थिति में वापस ले जाता है।



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