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अलर्ट रहें और डेंगू से बचे : स्वास्थ्य विभाग कर रहा लगातार निगरानी,अफवाहों पर ध्यान ने दें : जिला मलेरिया अधिकारी


रायगढ़ 02 नवंबर 2022, जून से नवंबर माह तक जिले में वेक्टर जनित रोग यानी मच्छरों से होने वाली बीमारियों के होने की अधिक संभावना होती है। स्वास्थ्य विभाग इस दौरान अलर्ट मोड में रहता है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि त्यौहारी सीजन में यहां के लोग दीगर प्रांतों में गए थे और अब लौट रहे हैं तो इनके साथ डेंगू भी आ सकता है। ऐसे लोगों की पहचान की जा रही है और लोग भी अपने स्तर पर सतर्क रहें।

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नियमित साफ-सफाई करें और जागरूक रहें। किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।

डेंगू पर नियंत्रण के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मधुलिका सिंह ठाकुर लगातार बैठकें ले रही हैं। हाल ही में समीक्षा में बैठक ने उन्होंने सभी विकासखंड चिकित्सा अधिकारियों को डेंगू-मलेरिया पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए साथ ही स्थानीय स्तर पर डेंगू के संभावित मरीजों के 0.5 एमएल सीरम सैंपल मेडिकल कॉलेज के लैब भेजने को भी सुनिश्चित करने को कहा है क्योकि मेडिकल कॉलेज ही किसी सैंपल के डेंगू होने की घोषणा कर सकता है। हाल ही में अन्य राज्यों में डेंगू मामले बढ़ रहे हैं वहीं जिले में डेंगू अभी तक आधिकारिक तौर पर इस वर्ष 28 मामले आए हैं जिनमें से 6 मामले बीते 7 दिन में मिले हैं।

जिले के सभी पैथालॉजी लैब और क्लीनिक को डेंगू जांच में सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं और उन्हें भी सैंपल मेडिकल कॉलेज भेजने के निर्देश दिए हैं। उन्हें किसी भी प्रकार के अफवाहों से दूर रहने और इसे बढ़ावा देने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर में पानी जमा नहीं होने देने के बारे में लोगों को जागरूक कर रही हैं। अमूमन पानी घर के छोटे–छोटे बर्तन, छत, खाली टंकी, गाय के लिए बने हौदी में जमा होता है यहीं डेंगू के लार्वा मिलने की सबसे ज्यादा संभावना रहती है। यदि लार्वा मिलता है तो टेमिफास्ट का घोल, जला मोबिल डालकर लार्वा को समाप्त किया जाता है।

घबराएं नहीं जागरूक हो इलाज करवाएं: डॉ. टीजी कुलवेदी

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. टीजी कुलवेदी ने बताया: “हाल ही में 6 लोगों की एलाइजा रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। लोग किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। लोगों को डेंगू के प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए इससे बचाव के उपाय अपनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कार्यकर्ता कार्य कर रहे हैं। अचानक सिर में तेज दर्द, बुखार, मांसपेशियों व जोड़ों में दर्द होना, उल्टी आना, त्वचा पर चकत्ते उभरना आदि डेंगू के लक्षण हैं। डेंगू का इलाज घर पर संभव है इसमें मरीज को जैसे लक्षण होते हैं उसके आधार पर दवा दी जाती है। अति गंभीर स्थिति यानी रक्त में प्लेटलेट्स की मात्रा 50,000 से कम हो जाए तब अस्पताल में भर्ती करना आवश्यक है। सामान्य तौर पर 1.5 से 4.5 लाख प्लेटलेट्स होते हैं। डेंगू या अन्य किसी बीमारी के मामले में घबराने की जरूरत नहीं है। जागरूक होकर इलाज कराने की जरूरत है। “

समाज का संवेदीकरण करना जरूरी : सीएमएचओ डॉ. ठाकुर

सीएमएचओ डॉ. मधुलिका सिंह ठाकुर ने बताया, “संचारी रोगों का व्यवहार परिवर्तन से गहरा संबंध है। डेंगू भी इसी प्रकार की बीमारी है। अगर समुदाय अपना व्यवहार बदले तो इस बीमारी पर अंकुश लगाया जा सकता है। डेंगू की रोकथाम के लिए एहतियाती कदम उठाने होंगे। साफ पानी का जमाव रोकना होगा और मच्छरों की ब्रीडिंग साइट्स नष्ट करनी होगी। नवंबर तक संचारी रोगों जैसे डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया आदि का खतरा बना रहता है। इस लिहाज से समुदाय का इन बीमारियों के प्रति संवेदीकरण करना बेहद आवश्यक है।”

डेंगू को जानिए
· प्लेटलेट का कम होना हमेशा डेंगू नहीं होता है।
· समय से चिकित्सालय पहुंचने पर डेंगू जानलेवा रूप नहीं धारण करता।
· चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण एक तरह के होते हैं। चिकित्सकीय जांच के बाद ही पता चल सकता है कि मरीज को डेंगू या चिकनगुनिया।
· डेंगू और चिकगुनिया एक ही प्रजाति के मच्छर के काटने से होता है और दोनों बीमारियों के मच्छर दिन में काटते हैं।
· मच्छरों से बचाव कर हम चिकनगुनिया और डेंगू समेत सभी मच्छरजनित रोगों पर अंकुश पा सकते हैं।