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दिव्यांग बच्चों के लिए जतन केंद्र में विशेष शिविर का हुआ आयोजन : दिव्यांगता के आंकलन के लिए जुटे विशेषज्ञ चिकित्सक


रायगढ़ ,दिव्यांग पुर्नवास केंद्र (जतन) में बीते दिनों दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिविर का आयोजन हुआ जिसमें बच्चों की दिव्यांगता आंकी गई। इसके लिए कई विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बच्चों का बारी-बारी से परीक्षण किया और बच्चों में दिव्यांगता को उनके पालकों को बताकर इलाज शुरू करने की सलाह दी। जतन केंद्र के डॉ. सिद्दार्थ सिन्हा ने बताया, “शासकीय स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के लिए दिव्यांगता आंकलन और फिर उपकरण वितरण के शिविर हर ब्लॉक में एक बार लगते हैं। जिसमें पहली बार में बच्चों की दिव्यांगता आंककर उसके अनुरूप उपकरण बनवाए जाते हैं। दिव्यांग बच्चों का दिव्यांग कार्ड भी बनाया जाता है जिसके बाद शिविर लगाकर इन बच्चों में उपकरणों का वितरण कर दिया जाता है। एमआर (मानसिक रूप से अस्वस्थ) किट जिसमें बच्चों के मस्तिष्क की क्षमता और संवेदनशीलता को बढ़ाने के लिए खिलौने होते हैं उन्हें भी जरूतमंदबच्चों को दिया जाता है।“

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मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी के निर्देश और राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तत्वाधान में आयोजित इस दिव्यांगता आंकलन शिविर में बच्चों के कान, नाक और गले की जांच के लिए डॉ. आरएन मंडावी (कान-नाक-गला रोग विशेषज्ञ), आंखों की जांच के लिए नेत्र सहायक अर्जुन बेहरा, अस्थि-बाधित रोगों के लिए डॉ. सिद्दार्थ सिन्हा और डॉ. राजकुमार गुप्ता, मानसिक स्वास्थ्य के लिए डॉ. प्रकाश चेतवानी और बच्चों में एमआर के लक्षण की पहचान के लिए बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक अग्रवाल मौजूद थे।

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जतन केंद्र के प्रभारी डॉ. मनीष नायक बताते हैं, “जतन में हर साल यह कैंप लगता है। बच्चों और उनके पालक यहां आते हैं और हमारी टीम द्वारा बच्चों में दिव्यांगता के सारे लक्षणों की जांच की जाती है। कई मामलों में अगर लक्षण का पता शीघ्र चले उपचार के द्वारा उसे ठीक करने की संभावना रहती है। इस बार शिविर में कुल 30 बच्चे आए थे। जिनके लिए आवश्यक उपकरणों की सूची तैयार कल ली गई है। शीघ्र ही कैंप लगाकर इन्हें बच्चों को दे दिया जाएगा।”

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समय से पहचान करें दिव्यांगता के लक्षणों का
रायगढ़ शहरी क्षेत्र से आए एक पालक ने बताया कि उनका बच्चा अभी 6 साल का है। जब से स्कूल जाना शुरू किया है तब से वह बता रहा है कि उसके टीचर उसकी चलने की तरीके को सामान्य नहीं मान रहे हैं। फिर हमने इसे जतन केंद्र लाया तो पता चला कि उसका दायां पैर जन्म से थोड़ा मुड़ा हुआ है जो बढ़ती उम्र के साथ और मुड़ता जा रहा है जिससे बच्चे को चलने में तकलीफ हो रही है। इसी तरह एक और बच्ची के पालक ने बताया कि उसकी बच्ची के होंठ कटे-फटे थे जिसके इलाज के लिए स्कूल में जतन के शिविर के बारे में बताया तो वह बेटी को लेकर जतन केंद्र आया जहां बेटी को बेहतर इलाज मिल रहा है।

पालक हिचकिचाएं नहीं: डॉ. सिन्हा
जतन केंद्र के डॉ. सिद्दार्थ सिन्हा कहते हैं “ कई दफे यह देखा गया है कि जिन बच्चों में दिव्यांगता के मामूली से लक्षण के होते हैं उनके पालक उसे नज़रअंदाज कर देते हैं क्योंकि उन्हें बच्चे के दिव्यांग होने से शर्म या झिझक महसूस होती है। किसी भी बच्चें में अगर थोड़ी सी भी विषमता नजर आए तो वह पहले अपने चिकित्सक से जांच कराएं अन्यथा जतन केंद्र रायगढ़ लेकर आए। यहां बच्चों की दिव्यांगता जांच से लेकर ऑटिज्म सभी की जांच निशुल्क होतीहै। पालक हिचकिचाएं नहीं, समय से मिला इलाज ही कारगर होता है।”