छत्तीसगढ़

…ताकि बीएमसी चुनाव में मिले बप्पा का आशीर्वाद, इसलिए नेता लगा रहे हैं गणपति मंडलों की दौड़



एक मोटे अनधिकृत अनुमान के मुताबिक इस बार गणपति मंडलों ने करीब 100 करोड़ रुपए की कमाई की है। इस साल गणपति मंडल स्थापित करने के लिए बीएमसी के पास 3,064 आवेदन आए थे। इनमें से 2,465 मंडलों को बीएमसी ने मंजूरी दी थी। हर मंडल पर 20-25 बैनर-होर्डिंग आदि तो लगे ही हैं। साधारण जोड़ भी करें तो सामने आ जाता है कि राजनीतिक दलों ने इस बार कितना पैसा लगाया है।

एक और नई बात इस बार के उत्सव में देखने को मिली है। वह यह कि शिंदे, फडणविस, आदित्य ठाकरे और राज ठाकरे के पुत्र अमित ठाकरे, सभी इस बार छोटे से छोटे गणपति मंडल का भी दौरा कर रहे हैं। छोटी-छोटी हाऊसिंग सोसायटी में भी इन लोगों ने मौजूदगी दर्ज कराई है।

हिंदुत्व के नए शुभंकर की खोज

लेकिन गणपति को लेकर राजनीतिक दलों के इस नए प्रेम से महाराष्ट्र के लोग खुश हैं और वे क्या सोचते हैं?

राजनीतिक विश्लेषक हेमंत देसाई का कहना है, “उत्सव का अब पूरी तरह राजनीतिकरण हो चुका है। मैंने अपने जीवन में इस तरह की सियासी हलचल गणपति के मौके पर कभी नहीं देखी। एक तरह से यह एक ऐसी दौड़ है जिसमें हर कोई खुद को कट्टर हिंदुत्व का अगुवा साबित करना चाहता है।”

देसाई की टिप्पणी में अमित शाह के हाल के मुंबई दौरे का संदर्भ निहित है कि महाराष्ट्र के लोग इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि भगवान राम का पूरी तरह राजनीतिक फायदा लेने के बाद बीजेपी अब गणपति को महाराष्ट्र में अपने हिंदुत्व के एजेंडे का आधार बनाना चाहती है।

राजनीतिक टिप्पणीकार सुरेंद्र जोंधाले की राय भी ऐसी ही है। वे कहते हैं कि इससे पहले तो कभी नहीं देखा गया कि सीएम और डिप्टी सीएम पूरे शहर में गणपति मंडलों में माथा टेकने के लिए दौड़ लगा रहे हों। यहां तक कि घरों में विराजमान छोटे गणपति के दर्शन भी कर रहे हैं। वे कहते हैं, “यह सिर्फ और सिर्फ बीएमसी चुनाव के लिए राजनातिक पैंतरा है।”



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