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बहरहाल इस पूरे मामले को लेकर नक्सलियों की तरफ से चार पन्ने का पत्र जारी किया गया है। इस पत्र में माओवादी नेताओं ने सरकार के उन सवालों का जवाब भी दिया हैं जो उनसे पूछे गए थे। पत्र में नक्सलियों ने सरकार पर आरोप लगाए हैं। उनका मानना हैं कि सरकार एक तरफ निःशर्त वार्ता का दावा करती हैं जबकि दूसरी तरफ उनकी तरफ से कई शर्ते लाद दी जाती हैं। ऐसे में बातचीत संभव नहीं हैं। पत्र में नक्सलियों ने अपने आंदोलन को जनता का आंदोलन बताते हुए कहा हैं कि उनका आंदोलन कमजोर नहीं बल्कि मजबूत हुआ हैं। अपने खत में नक्सलियों ने दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल और झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम का जिक्र किया हैं।
कहा है कि जब सरकार सी.एम. को नहीं बख्शती तो हमारे साथ उनका रवैय्या कैसा होगा.