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ईओडब्ल्यू ने IPC के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश विश्वासघात और जालसाजी सहित कुल 7 धाराओं में अपराध दर्ज किया गया है। कांग्रेस ने पूर्व CM भूपेश बघेल को राजनांदगांव लोकसभा सीट से टिकट दिया है। ऐसे में अब एफआईआर दर्ज होने के बाद EOW के रूख पर सबकी नजरें टिकी हुई है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि FIR के बाद ईडी उन्हें नामांकन दाखिल करने से रोक सकती है।
यदि EOW उन्हें ऐसा करने से रोकती है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ा झटका होगा। निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक प्रत्याशी उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर या आरोप दर्ज होने की जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। प्रत्याशी को यह बताना होता है कि उनके किस मामले में अपराध दर्ज है। साथ ही पार्टी को भी यह सूचित करना होता है कि दागी होने के बाद भी टिकट क्यों दी गई। इलेक्शन कमीशन ने इसके लिए एक प्रारूप भी तैयार किया है।
अब भूपेश बघेल को राजनांदगांव के नामांकन के शपथ पत्र में अभी दर्ज हुए मामले की सभी धाराओं 120 बी, 34, 406, 420, 467, 468, 471 तथा धारा 7, 11 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 यथा संशोधित अधिनियम 2018 का अपराध होने का भी उल्लेख करना पड़ेगा। मिली जानकारी के अनुसार भूपेश बघेल के खिलाफ प्रोटेक्शन मनी के तौर पर 508 करोड़ रुपए लेने के आरोप में ईओडब्लू और एसीबी विंग ने एफआईआर दर्ज की गई है। भूपेश बघेल पर आरोप है कि उन्होंने महादेव बैटिंग ऐप के मालिक रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर को प्रोटेक्शन देने के नाम पर 508 करोड़ रुपए लिए हैं।
हालांकि ये मामला विधानसभा चुनाव 2023 से पहले सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने खंडन किया था। साथ ही ये भी कहा था कि अगर भूपेश बघेल पर आरोप लग सकते हैं तो BJP नेताओं पर भी आरोप लगाए जा सकते हैं। किसी के आरोप के आधार पर केस दर्ज नहीं किया जा सकता है। सांसद विजय बघेल ने कसा तंज, कहा- ये तो होना ही था : पूर्व CM भूपेश बघेल के खिलाफ महादेव बैटिंग एप मामले में FIR दर्ज होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो चुकी है।
वहीं पूर्व CM भूपेश बघेल को कांग्रेस के द्वारा राजनांदगांव लोकसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया है। इससे पार्टी को बड़ा झटका लगने की संभावना है। महादेव सट्टेबाजी में बड़ी रकम के लेनदेन मामले में ED की लगातार कार्रवाई केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में चल रही है। अब दुर्ग सांसद विजय बघेल ने पूर्व CM पर निशाना साधा है। इसी साल 8 और 30 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा राज्य पुलिस को दो रिपोर्ट भेजे जाने के बाद बघेल के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है।
पूरे मुद्दे पर दुर्ग लोकसभा प्रत्याशी विजय बघेल ने तंज कसते हुए कहा है कि ये तो होना ही था। सभी प्रश्न उठा रहे थे कि कब होगा। अब शुरू हुआ है। अब आगे आगे देखिए होता है क्या। उन्होंने आगे कहा कि भ्रष्टाचार किए हैं तो कानून के शिकंजे में आएंगे ही। उसका अंजाम भुगतना पड़ेगा। कांग्रेस के कोई नेता जेल में हैं। तो कई जेल जाने की कगार पर हैं और भूपेश बघेल अंदर भी जा सकते हैं। नामजद FIR दर्ज बता दें कि मामले में पूर्व CM भूपेश बघेल को आरोपी के रूप में नामित कर मामला दर्ज किया गया है। इस ऐप की अनुमानित लेनदेन 6,000 करोड़ बताई जा रही है। भूपेश बघेल पर पुलिस के एफआईआर में आईपीसी के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, विश्वासघात और जालसाजी से संबंधित विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 11 के तहत आरोप लगाया गया है।
बिल्डर, माफिय़ा, स्मार्ट सिटी, खनिज, आयरन ओर, वैक्सीन, सैनीटाइजर से जो पैसे आए उसका उल्लेख है। हाउसिंग बोर्ड की संपत्ति सहित सरकारी ज़मीन की खरीदी-बिक्री से प्राप्त हुआ विभिन्न मदों से पैसा आना और देश के बड़े कांग्रेसी नेताओं के नाम पर पैसे का प्रतिमाह रायपुर ऑफि़स से जाने का भी उल्लेख है।
जिसमें सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी, पवन बंसल, केसी वेणुगोपाल, प्रदीप नरवाल, संदीप सिंह, मनोज त्यागी जैसे प्रमुख कांग्रेस के नेताओं के अलावा डायरी में गिरीश देवांगन, सुनील अग्रवाल, अनिल अग्रवाल, आरके श्रीवास्तव, मनीष बंछोर, भूपेश बघेल और उसके बेटे और दामाद का नाम के साथ सनी अग्रवाल, सौम्या चौरसिया, रानू साहू आईएएस, कृष्णा चंद्राकर, सुजीत चंद्राकर, सूर्या तिवारी के नाम है। जैसे बड़े माफिय़ा गिरोह के अलावा रायपुर शहर के सौ लोगों से ज़्यादा का नाम शामिल बताया जा रहा है। जब्त डायरी में उल्लेखित हर घटनाक्रम को ईडी गंभीरता से ले रही है। सोनिया गांधी प्रियंका गांधी राहुल गांधी और एआईसीसी के प्रमुख नेताओं व्दारा जो हफ़्ता वसूली भूपेश सरकार से की जाती थी, उसका राजफास होने में अब ज्यादा देर नहीं है। ऐसा उक्त डायरी के खुलासे के बाद हो सकता है