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शिटपोस्टिंगः ऐसी पुरानी फिल्मों का जश्न, जिन्हें सिनेमा इतिहास में भी जगह न मिले



लेकिन फिर फेसबुक पर ‘आई लव ट्रैशी (कचरा) हिंदी मूवीज’ जैसा लोकप्रिय ग्रुप भी है जो मिथुन चक्रवर्ती को अपना ‘संत-संरक्षक’ और ‘गुंडा’ को अपना ‘बाइबिल’ मानता है। इसका दर्शन बहुत साफ है और फेसबुक पेज पर दर्ज भी: “अगर आप कम दिमाग खाने वाली, बेसिरपैर की, बी ग्रेड, कचरा या कैसी भी हिन्दी फिल्म देखना पसंद करते हैं तो यह ग्रुप आपके लिए है। और अगर आपने ‘आतंक ही आतंक’, ‘दरियादिल’, ‘फ्री एंट्री’, ‘जुल्म की हुकुमत’, ‘खुदा मेहरबान तो गधा पहलवान’ देख रखी हैं तो हम आपको ग्रुप के मॉडरेटर राइट्स तत्काल देने में कोई कोताही नहीं करेंगे।”

यहां ‘कचरा’ की परिभाषा बहुत साफ है: “कचरा हमारे लिए एक क्लिशे है। मतलब कोई चीज इतनी बुरी हो कि वाकई अच्छी लगने लगे… सफेद जूते, खलनायक, अजीबोगरीब संवाद, रोती हुई माएं, तकिया कलाम… इसके कुछ उदाहरण हैं। कुछ इतना उबाऊ जिसमें किसी की कोई दिलचस्पपी न हो।”



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