ताज़ा खबर

भक्ति में नियम एवं संयम जरूरी आचार्य आर्जव सागर महाराज, शनि अमावस्या के अवसर पर मुनीसुव्रत नाथ भगवान की शांति धारा की गई


Jain4

अकलतरा- शनि अमावस्या के अवसर पर जैन मंदिर में श्री 1008 मुनीसुव्रत नाथ भगवान का जलाभिषेक एवं शांति धारा की गई, शांति धारा करने का सौभाग्य भागचंद जैन रूपेश जैन परिवार एवं केके जैन निशांत जैन परिवार को प्राप्त हुआ ।

Jain2

जैन समाज के लोगों द्वारा आचार्य श्री 108 आर्जव सागर महाराज की पूजा अर्चना की गई, धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री 108 आर्जव सागर महराज ने कहा कि चाहे भक्ति हो या साधना हो उनमें जब तक नियम,संयम, श्रद्धा, समर्पण, आस्था एवं विश्वास नहीं है तो तब तक इसका कोई प्रतिफल हमें मिलने वाला नहीं है नियम संयम के साथ प्रभु की भक्ति की जाती है तब निश्चित ही उससे हमें शक्ति प्राप्त होती है अपने गुरु के प्रति समर्पण और धर्म के प्रति पूरी निष्ठा का भाव जब जागृत होता है तब पवित्र एवं सुदृढ़ता के साथ जीवन सहजता से मुझे लगता है कर्मों को कम करने के लिए प्रभु की भक्ति की महत्वता को सभी धर्मों में सर उसे बताया गया है भक्ति में भी निष्काम अथवा मोक्ष की कामना से की जाने वाली भक्ति को जग में सर्वोत्तम कहा गया है भक्ति से मन खुशियों से भर उठता है और संसार की जगह जब भक्त प्रभु की शरण में होता है तभी तो पुण्य कर्म संजय हो पाते हैं इसलिए जीवन में जब कभी भी प्रभु की भक्ति का अवसर प्राप्त हो उससे वंचित ना रहे अपनी इंद्रियों पर संयम का यह भी एक मार्ग है मन को पवित्र बनाने का भी यह पावन तरीका है। जब पूर्व जन्म का पुण्य होता है सभी मानव को धन स्वस्थ शरीर भरा पूरा परिवार एवं सुख वैभव की प्राप्ति होती है लेकिन क्या कभी हमने चिंतन किया है कि पूर्व जन्म के शुभ कर्म कौन से थे निश्चित ही जब आत्मा ने प्रभु की भक्ति नियम संयम का पालन किया होगा तभी उसका सु परिणाम हमें प्राप्त हो रहा है रावण ने भी भक्ति के बल पर ही असीम शक्तियां हासिल की थी लेकिन उसकी एक गलती ने उसे पसंद की ओर धकेल दिया ।

Jain3

धर्म सभा मे मुनि श्री 108 भाग्य सागर महराज, महत सागर महराज , विशोध सागर महराज, विभोर सागर महराज, आर्यिका प्रतिभा मति माताजी, सुयोग मति माताजी , सौभाग्य मति माताजी जी , शिक्षा मति माताजी एवं आर्यिका संक्षेप मति माता जी विराजमान थी। कार्यक्रम का संचालन जैन समाज के संरक्षक सुशील जैन ने किया।

Jain1

कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष राजकुमार जैन,, उपाध्यक्ष राजेश जैन, सचिव रूपेश जैन, कोषाध्यक्ष विमल जैन, वीरेंद्र जैन , सुभाष जैन , सत्येंद्र जैन, सुनील जैन,संजय जैन , विजय किशोर जैन, प्रवीण जैन, रितेश जैन, बबलू जैन, राजू जैन, बिसू जैन, तनीष जैन, सरोज जैन, संध्या जैन, रश्मि जैन, संगीता जैन, लक्ष्मी जैन, रानू जैन, ममता जैन,, मणि जैन, सुमन जैन, सीमा जैन, ऋतु जैन, भारती जैन, मुक्ता जैन, प्रशंसा जैन, आरजू जैन एवं जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित थे।