छत्तीसगढ़

दुर्लभ दुनिया संगीत की: सिर्फ एहसास है यह, रूह से महसूस करो…



यहीं अचानक पता चलता है कि हारमोनियम कभी पैरों से भी बजाया जाता था। 1980 का पैरों से बजने वाला यह हारमोनियम यहां संरक्षित है जिसका निर्माण बंबई की कंपनी डीएस रामसिंह एंड ब्रदर्ज ने किया था। म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट बनाने वाले फ्रेंच सेबस्तियन एरार्ड जिनका बनाया पियानो महारानी विक्टोरिया को भी पसंद था, का एक नमूना (1904 मॉडल) भी यहां मौजूद है। 

यह अहसास ही अद्भुत है कि यहां संगीत के तमाम घराने भी अपने इतिहास और विरासत के साथ मौजूद हैं। ‘घरानाज- द फ्लावरिंग डायवर्सिटी’ में शास्त्रीय संगीत के घरानों का इतिहास है तो ध्रुपद का डागर, दरभंगा, बेतिया, मथुरा, तलवंडी, बिशनुपर और खयाल के आगरा, ग्वालियर, जयपुर, किराना, पटियाला घरानों का परिचय उनके दिग्गजों की तस्वीरों और बारीकियों के साथ मिलता है।

टाइमलाइन ऑफ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक वैदिक युग से लेकर मध्यकालीन, भक्ति युग, भरत मुनि का दौर, हिन्दुस्तानी म्यूजिक में दिल्ली सल्तनत, मुगल काल, कलोनियल युग और कर्नाटक संगीत के विजयनगर पीरियड, प्री ट्रिनिटी, ट्रिनिटी और पोस्ट ट्रिनिटी पीरियड से लेकर मौजूदा दौर तक की यात्रा की खिड़की खोलता है जिसे आप ऑडियो-विजुअल फार्म में मनमाफिक देख सुन सकते हैं। तबस्सुम, अमीन सयानी से लेकर आकाशवाणी के अत्यंत लोकप्रिय नाम देवकी नंदन पांडेय भी अपनी आवाज के साथ यहां मिल जाते हैं।  



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