छत्तीसगढ़

भारी आर्थिक मंदी की कगार पर एक तिहाई विश्व, अमेरिका-चीन जैसे साम्राज्यवादी देशों के लिए अवसर



कच्चे तेल की कीमतों का उतार-चढ़ाव इस निष्कर्ष की पुष्टि करता है कि यूक्रेन युद्ध मुद्रास्फीति की वृद्धि की मूल वजह नहीं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में वृद्धि मुख्य रूप से 2021 में हुई जब विश्व अर्थव्यवस्था महामारी से उबर रही थी। वर्ष 2021 के दौरान वृद्धि 50 प्रतिशत से अधिक रही और यह 50.37 से बढ़कर 77.24 डॉलर प्रति बैरल हो गई। 2022 में, जब यूक्रेन युद्ध हुआ, कीमत 78.25 से 82.82 के बीच थी। रूस के खिलाफ प्रतिबंध के तुरंत बाद तेल की कीमतों में तेजी आई, जो 2022 में 133.18 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची लेकिन फिर कीमतें तेजी से गिरीं। इसलिए यह नहीं कह सकते कि मुद्रास्फीति की वजह यूक्रेन युद्ध था।

सिर्फ ब्रेटन वुड्स संस्थान का विश्लेषण ही त्रुटिपूर्ण नहीं। इससे भी अधिक ध्यान देने योग्य बात यह है कि उन्हें कोई आभास नहीं कि विश्व मंदी कैसे समाप्त होगी। अगर यूक्रेन युद्ध मंदी की वजह है तो उन्हें यह मानकर चलना चाहिए था कि हालात जल्द ही बदल जाने वाले हैं। वैसे, पश्चिमी साम्राज्यवाद युद्ध को खींचना चाहता है ताकि रूस को घुटनों पर लाया जा सके। भले ही उन्होंने युद्ध को समाप्त करने के सवाल पर चुप रहना चुना हो, वे ब्याज दरों को बढ़ाकर और मंदी को दूर करने के अलावा किसी अन्य तरीके से मुद्रास्फीति संकट से निपटने के बारे में कह सकते थे।



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