छत्तीसगढ़

शिवसेना किसकी! दावों पर अब चुनाव आयोग लेगा फैसला, सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई पर लगी रोक हटाई



उद्धव ठाकरे ने शीर्ष कोर्ट से शिवसेना विवाद में विधायकों की योग्यता पर फैसला होने तक चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी, जिस पर 23 अगस्त को चीफ जस्टिस एनवी रमना की पीठ ने केस संविधान पीठ को भेजते हुए चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।

फोटोः सोशल मीडिया
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शिवसेना विवाद में आज सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने शिवसेना पर शिंदे गुट के दावे पर चुनाव आयोग की कार्रवाई पर लगी रोक हटा दी है। अब चुनाव आयोग तय करेगा कि असली शिवसेना कौन सी है- उद्धव ठाकरे की या एकनाथ शिंदे की। चुनाव आयोग शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर भी फैसला कर सकता है।

पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे के गुट ने याचिका दायर कर शिवसेना विवाद में विधायकों की योग्यता पर फैसला होने तक चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए 23 अगस्त को चीफ जस्टिस एनवी रमना की पीठ ने केस संविधान पीठ को भेजते हुए चुनाव आयोग की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। इससे पहले चुनाव आयोग ने सिंबल को लेकर शिंदे गुट के आवेदन पर सभी पक्षों को नोटिस भेजकर जवाब देने के लिए कहा था।

सुप्रीम कोर्ट में उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि शिंदे गुट में जाने वाले विधायक संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता से तभी बच सकते हैं, जब वे अलग हुए गुट का किसी अन्य पार्टी में विलय कर देते हैं। उन्होंने कहा था कि उनके बचाव का और कोई दूसरा रास्ता नहीं है। वहीं पिछली सुनवाई में एकनाथ शिंदे के वकील ने कहा था कि हमारे ऊपर अयोग्यरता का आरोप गलत है। हम अभी भी शिवसैनिक हैं।

बता दें कि महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ शिवसेना में विवाद 20 जून को उस शुरू हुआ, जब अचानक राज्य सरकार में मंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी के 15 और करीब 10 निर्दलीय विधायक सूरत होते हुए गुवाहाटी पहुंच गए। इसके बाद कई दिनों तक सियासी ड्रामा चला और दोनों ओर से दावे और प्रति दावे किए जाते रहे। अंततः शिंदे गुट ने शिवसेना के 55 में से 39 विधायकों के साथ होने का दावा किया, जिसके बाद उद्धव ठाकरे ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद शिंदे गुट ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार का गठन कर लिया, जिसमें एकनाथ शिंदे सीएम और देवेंद्र फडणवीस उप मुख्यमंत्री बने।




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