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माइक्रो फाईनेंस और स्मॉल बैंक कर रहे खुल्लमखुल्ला आर.बी.आई. के गाईड लाइन का उल्लंघन, किस्त वसूली के नाम पर कर रहे हैं ग्राहको को परेशान


रायगढ़ ,रायगढ़ जिले में इन दिनों महिला समूह बना कर ग्रुप लोन के नाम पर अधिकतम ब्याज दर पर माइक्रो फाईनेंस और स्मॉल बैंक के द्वारा ऋण दिया जाता हैं। इनसे करोड़ो का बिजनेस करने वाले स्मॉल बैंक के कर्मचारियों का रवैया लोन देने तक नरम रहता हैं पर जब बात वसूली पर आती हैं इन सज्जन कर्मचारियों का एक अलग ही रूप नजर आता हैं।
दर्जनों माइक्रो फाईनेंस व स्मॉल बैंक शहर व गाव में लगभग हर जगह ५-१० महिलाओ का एक समूह बना कर २०-२५% ब्याज दर पर ऋण देती है और नियम और शर्तो पर हस्ताक्षर करा कर अपने को सुरक्षित रखने की कवायद पहले की जाती है। वही दूसरी ओर इनके कर्मचारियों के द्वारा लोन निकालने के नाम से अवैध राशि ली जाती हैं, जो उनकी पॉकिटमनी होती हैं.
लोन देने के बाद असली खेल शुरू होता हैं इनका “वसूली अभियान” । साल के ३६५ दिन में जो भी नियत तिथि होगी चाहे उस दिन स्थानीय और राष्ट्रीय अवकाश हो तब भी इनके अधिकारी व कर्मचारियों सुबह ६ बजे से रात १० बजे तक वसूली अभियान मे जुटे होते हैं, या फिर नियत तिथि से पहले एडवांस किश्त जमा कराया जाता है।
एक तरफ इनके रिजनल मैनेजर, बैक मैनेजर तक महिलाओ से अपशब्द से बात करते है जिससे उनकी सामाजिक छवि धूमिल होती है| इस प्रकार ये मानसिक तनाव देते हैं तथा अपने कर्मचारियों को अवकाश के दिन भी कार्य करा कर उनका भी शोषण करते हैं।
यहाँ गौर करने वाली बात यह हैं कि रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की गाइड लाइन के अनुसार ये राष्ट्रीय और स्थानीय अवकाश के दिन रिकवरी नही कर सकते, ऑफिस मे कर्मचारियों से काम नही ले सकते, बैंक के ऋणदाता से बुरा व्यवहार नही कर सकते है अन्यथा इनका लाइसेंस रद्द कर दिया जायेगा
बहरहाल माइक्रो फाईनेंस और स्माल बैंक के मकड़जाल में ये जरूरतमंद महिलाएं व उनका परिवार इस तरह से उलझ गई है कर रह गया है जिससे ना तो ये त्योहार खुशनुमा माहौल मे मना पाते हैं और ना इनके शोषण के खिलाफ कुछ कर पा रहें है।  ऐसी जटिल व विषम परिस्थिति को शीघ्र नियंतित्र नहीं किया गया तो वह दिन दुर नहीं जब इनके दिये मानसिक प्रताड़ना से कोई पीडित जरूरतमंद महिला आत्महत्या करने को मज़बूर हो जाएं और एक परिवार बिखर जाए क्योंकि पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।