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Mutual Funds : सीख लें अपने पोर्टफोलियो को री-बैलेंस करना, कभी नहीं होगा नुकसान!



हाइलाइट्स

तीन तरीकों से री-बैलेंस किया जाता है म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो.
पीरियोडिक री-बैलेंसिंग, और डीविएशन आधारित री-बैलेंसिंग दो तरीके हैं.
पीरियोडिक और डीविएशन दोनों को मिलाकर एक तीसरा तरीका बनता है.

नई दिल्ली. म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने के कुछ साल बाद निवेशकों के सामने 2 समस्याएं आती हैं. पहली यह है कि अपने पोर्टफोलियो को कब और कैसे री-बैलेंस (Rebalance) किया जाए? दूसरी यह है कि कैसे अपने पोर्टफोलियो में स्कीम्स की संख्या को कम करके इसे क्लीन किया जाए. जबकि आप इन दोनों चीजों को स्वतंत्र रूप से करने की कोशिश कर सकते हैं, आइए यह समझने की कोशिश करें कि आप इन दोनों को एक-साथ कैसे अचीव किया जा सकता है.

इसे समझाने के लिए हम एक आसान-सा उदाहरण लेंगे. मान लीजिए आपने 60:40 इक्विटी-डेट आवंटन के साथ निवेश करना शुरू किया. लेकिन 2-3 अच्छे वर्षों के बाद आपका इक्विटी के लिए आवंटन 74:26 तक पहुंच गया. मतलब, आपके इक्विटी आवंटन का मूल्य 60 प्रतिशत बढ़ गया है. बाजार बढ़ा और इक्विटी में अब आपके पोर्टफोलियो का 74 प्रतिशत हिस्सा लगा है. साथ ही, चूंकि आप कई वर्षों से निवेश कर रहे हैं तो आपके पोर्टफोलियो में 11 इक्विटी फंड और 4 डेट फंड हो चुके हैं.

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बता दें कि री-बैलेंसिंग मूल रूप से तय किए गए एसेट आवंटन की समीक्षा करने और उन्हें वैसे ही फिर से बहाल करने से जुड़ा है. इस केस में, इक्विटी पोर्टफोलियो के 74 प्रतिशत तक बढ़ गई है और इसलिए, आप इसे 60 प्रतिशत पर वापस लाना चाह सकते हैं, जैसा कि आपने शुरू में किया था. इसका मतलब ये हुआ कि इक्विटी से 14 फीसदी बेचकर उस पैसे को डेट फंड्स में डाल देना.

तीन तरीकों से री-बैलेंस किया जाता है पोर्टफोलियो

नंबर 1: पीरियोडिक री-बैलेंसिंग (Periodic rebalancing)
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसे एक अवधि के बाद री-बैलेंस किया जाता है. इसे साल में एक बार किया जा सकता है. कुछ लोग इसे इसे अर्धवार्षिक करते हैं. लेकिन, आमतौर पर इसे एक साल में एक बार करना अच्छा माना जाता है.
नंबर 2: डीविएशन आधारित री-बैलेंसिंग (Deviation-based rebalancing)
यदि आपका आवंटन पहले से निर्धारित सहिष्णुता बैंड (Tolerance band) से अधिक डीविएट हो जाए तो इसे तरीके से बैलेंसिंग होती है. मान लीजिए कि टोलरेंस बैंड +/- 5 प्रतिशत है. तो, 60-40 के सीन में, यदि आपका पोर्टफोलियो 55 प्रतिशत से नीचे या 65 प्रतिशत से ऊपर चला जाता है, तो इसे पुनर्संतुलित करना होगा.
नंबर 3: दोनों में से सर्वश्रेष्ठ को चुनना
तीसरा विकल्प उपरोक्त दोनों को मिलाना है. निवेशक समय-समय पर समीक्षा करता है (मान लीजिए अर्ध-वार्षिक), लेकिन पुनर्संतुलन तभी होता है जब वह टोलरेंस बैंड से अधिक बदल जाता है. मेरी नजर में यह सबसे अच्छा विकल्प है.

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हम अपने उदाहरण पर वापस आते हैं. पोर्टफोलियो 60-40 से 74-26 पर आ गया है और इसे पुनर्संतुलित करने की जरूरत है. चूंकि प्रत्येक पोर्टफोलियो अपने आप में यूनिक और अलग है तो इसलिए अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करने के बारे में कुछ दिशानिर्देश यहां दिए गए हैं-

क्या आपको वाकई ज्यादा लार्ज-कैप फंड्स की जरूरत है?
बहुत से ऐसे साक्ष्य हैं जो ये बताते हैं कि लार्ज कैप फंड्स के लिए अपने बेंचमार्क इंडेक्स को बीट करना अथवा उससे ज्यादा रिटर्न देना मुश्किल होता है. तो यह देखें कि आपने कितने लार्ज कैप फंड्स में निवेशक किया है और आपके पोर्टफोलियो पोर्टफोलियो में ऐसे कितने फंड हैं.

आप एक्टिव लार्ज-कैप फंड्स से धीरे-धीरे बाहर निकल सकते हैं. केवल इंडेक्स फंड्स के जरिए लार्ज-कैप में निवेश करना समझदारी है. किसी भी मामले में, अधिकांश एक्टिव लार्ज-कैप और इंडेक्स फंडों में ओवरलैपिंग पोर्टफोलियो होते हैं. इसलिए, बेहतर होगा कि धीरे-धीरे इनसे छुटकारा पाएं और लार्ज-कैप एक्सपोजर के लिए 1-2 इंडेक्स फंड रखें.

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मिड और स्मॉल-कैप स्पेस वह जगह है, जहां एक्टिव फंड्स अभी भी एक अच्छा दांव हैं. लेकिन इन दोनों कैटेगरीज़ में बहुत ज्यादा स्कीमों का होना जरूरी नहीं है. जब तक आपके पास एक बड़ा पोर्टफोलियो न हो, इन दोनों श्रेणियों में से प्रत्येक में अपने आप को 1-2 फंड तक सीमित रखें. साथ ही, अधिकांश लोगों को स्मॉल-कैप फंडों की बिलकुल भी आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इनमें रिस्क ज्यादा होता है.

डुप्लीकेट से बचें
म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक सबसे बड़ा कारण विविधीकरण है. 5,000 रुपये (अधिकांश योजनाओं में न्यूनतम निवेश) के लिए, आपकी म्यूचुअल फंड योजना 30-60 शेयरों में विविधता ला सकती है. लेकिन अगर आपके पास एक ही प्रकार की म्यूचुअल फंड योजनाएं हैं, जैसे, 3-4 फ्लेक्सी-कैप फंड, तो आप पाएंगे कि आपके पोर्टफोलियो में एक जैसे ही स्टॉक हैं, जोकि अच्छा नहीं है.

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अपने डेट फंड को न भूलें
डेट फंड आपके समग्र पोर्टफोलियो में इक्विटी फंड की तरह ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अपने डेट फंड पर भी नजर रखें. चूंकि डेट फंड मामूली दर से बढ़ते हैं, इसलिए वे आपके एसेट एलोकेशन को इक्विटी फंड के रूप में बड़े स्तर पर नहीं बदलेंगे. लेकिन ऐसे समय में, जब ब्याज दरें बढ़ रही हैं या अपने चरम पर हैं, डेट फंड आपके पोर्टफोलियो में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. जब दरें गिरती हैं, जब ब्याज दर चक्र उलट जाता है, तो डेट फंड आपके पोर्टफोलियो को सहारा देते हैं.

खराब फंड्स से छुटकारा पाएं
फंड का उसके साथ की अन्य कंपनियों और उसके अपने बेंचमार्क का रिटर्न जरूर ट्रैक करें. यदि कोई फंड लगातार खराब प्रदर्शन करता है, तो उससे छुटकारा पाएं. अपने पोर्टफोलियो में 5-7 प्रतिशत वेटेज (या उससे कम) वाले फंड निकालें. ये ऐसे फंड हैं जिन्हें आपने कुछ समय पहले निवेश किया होगा, या जिसमें आपने अपनी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) बंद कर दिया है. या आपने अतीत में एक छोटी तदर्थ राशि का निवेश किया होगा. कुल पोर्टफोलियो रिटर्न को प्रभावित करने के लिए इनका आवंटन बहुत कम है, इसलिए उनसे छुटकारा पाने में ही भलाई है.

उपरोक्त कदम न केवल आपके पोर्टफोलियो को पुनर्संतुलित करने में मदद करेंगे, बल्कि फंड की संख्या को कम करने और इसे व्यवस्थित करने में भी मददगार होंगे.

नोट : इसके लेखक DEV ASHISH एक SEBI रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर (RIA) हैं. वे StableInvestor के संस्थापक हैं.

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