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जानें क्या होता है सूखा? जो रेंगते हुए आता है और चुपचाप बड़े पैमाने पर तबाही मचाता है



सुधार और भविष्य की जरूरतें

किसी क्षेत्र में सुधार की क्षमता इस पर निर्भर करेगी कि वहां पड़ा सूखा कितना गंभीर और कितनी लंबी मियाद वाला है। यह भी, कि मिट्टी को फिर से तर करने लायक, भूजल को रिचार्ज करने लायक और जलाशयों को सराबोर करने लायक, पर्याप्त बारिश हुई है या नहीं।

यूरोपीय आयोग के संयुक्त शोध केंद्र में वरिष्ठ शोधकर्ता आंद्रेया टोरेटी कहते हैं कि सूखों से निपटने के लिए जल प्रबंधन तरीकों में सुधार करना होगा, लोगों को उसमें जोड़ना होगा और ग्लोबल वॉर्मिंग को पूर्व औद्योगिक स्तरों से ऊपर डेढ़ डिग्री सेल्सियस पर सीमित करना होगा।

टोरेटी कहते हैं, “मध्यम से दीर्घ अवधि में वैश्विक स्तर पर हमें ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में इतनी कटौती करनी होगी कि वे कम से कम पैदा हों और अतिरिक्त ग्लोबल वॉर्मिंग के जोखिम को कम किया जा सके।”

राकोवेक ने जोर देकर कहा कि “प्रचंड सूखे के हालात से निपटने के लिए नये प्रौद्योगिकीय विकास” की जरूरत है।

क्षेत्रीय स्तर पर विशाल जलाशयों का निर्माण, भूमिगत भंडारण, जरूरत के लिए पानी को बचाए रख सकता है। जड़ों तक पहुंचने वाली सिंचाई की स्मार्ट, तेज तकनीक पानी को बेकार जाने से भी रोक सकती है और पौधों को स्वस्थ रख सकती है। राकोवेक कहते हैं कि ताप-निरोधी फसलों को उगाने से सूखे के दौरान होने वाले नुकसान कम किए जा सकते हैं।

एकल पेड़ों के बजाय मिश्रित वनों को उगाना भी एक अच्छा विचार है। क्योंकि विविध प्रजातियां पानी को बेहतर ढंग से संरक्षित रख सकती हैं और सूखे से बच सकती हैं। राकोवेक कहते हैं कि अंततः यूरोप को प्रचंडताओं के हिसाब से ढलना ही होगा।



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