छत्तीसगढ़

अत्यंत जरूरी हो गई है एनआईए और यूएपीए की समीक्षा, बिना ठोस तर्क के ही राज्यों से ले ली जाती है जांच



अध्ययन में इस बात का जिक्र किया गया है कि एनसीआरबी ‘मुख्य अपराध’ के तौर पर किन अपराधों को रखता है, इससे जुड़ी प्रक्रिया में गड़बड़ी है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति पर बलात्कार और हत्या- दोनों का आरोप लगाया जाता है, तो एनसीआरबी मामले को ‘हत्या’ के रूप में रिकॉर्ड करता है क्योंकि इसमें ज्यादा सजा होती है। ऐसे ही जब किसी इंसान पर अन्य आरोपों के साथ यूएपीए के तहत भी आरोप लगाया जाता है, तो एनसीआरबी डेटा यह स्पष्ट नहीं करता कि मुख्य अपराध क्या है।

इतनी अस्पष्टता के बावजूद, अध्ययन दो और परेशान करने वाली प्रवृत्तियों की ओर इशारा करता है। यूएपीए के तहत जो मामले दर्ज किए गए, उनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की थी जो यूएपीए अधिनियम की धारा 18 के तहत दर्ज हुए थे। यह धारा ‘साजिश’ से जुड़ी है और ‘साजिश’ में तो हिंसक गतिविधि को अंजाम देने की ‘रजामंदी’ शामिल होती ही है। अध्ययन में कहा गया है कि इस धारा की मनमानी व्याख्या ने एनआईए को इसके तहत राजनीतिक विरोधियों और सरकार की नीतियों का सार्वजनिक विरोध करने वालों को गिरफ्तार करने में सक्षम बनाया। दिलचस्प बात यह है कि ‘साजिश’ के तहत दर्ज 64 फीसदी मामलों में किसी घटना का जिक्र नहीं किया गया। जबकि अन्य मामलों में घटना का जिक्र होता है, जैसे- बम विस्फोट, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना वगैरह।



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