छत्तीसगढ़

भारत जोड़ो यात्रा: लोगों को जोड़ते अभियान से तैयार हो रही सद्भाव की अद्भुत जमीन



बदानवालू के लिंगायत और दलितों के बीच सुलह कराने में राहुल गांधी की भूमिका की सराहना हो रही है और माना जा रहा है कि इससे आने वाले दिनों में कांग्रेस को चुनावी लाभ मिलेगा। ध्यान रहे कि 1990 में जब लिंगायत समुदाय से आने वाले तब के मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल को हटाया गया था उसी के बाद से लिंगायत समुदाय कांग्रेस से छिटक गया था। इसके बाद लिंगायत समुदाय का समर्थन रामकृष्ण हेगड़े को मिला जिन्होंने बीजेपी को कर्नाटक में पाला-पोसा था। सन् 2000 में लिंगायत समुदाय के मजबूत माने जाने वाले नेता बी एस येदियुरप्पा को बीजेपी ने चेहरा बनाया। लेकिन अब कांग्रेस इस समुदाय में अपनी अच्छी पैठ बना रही है।

रही बात दलितों की तो हाल के सालों में दलित समुदाय बीजेपी और कांग्रेस दोनों के बीच लगभग बराबर बंटा हुआ है।

लेकिन भारत जोड़ो यात्रा को मिल रहे अद्भुत समर्थन से स्थितियां बदली हैं। जिस तरह अभी अगस्त माह में सिद्धारमैया के जन्मदिन पर लोग जुटे उससे बीजेपी खेमे में खलबली है। वैसे भी कांग्रेस के पेसीएम अभियान के बाद से बीजेपी काफी बेचैन है।

वैसे कांग्रेस ने 30 अक्टूबर को कर्नाटक के कलबुर्गी में बड़ी रैली की योजना बनाई है, लेकिन तब तक भारत जोड़ो यात्रा कर्नाटक से जा चुकी होगी।



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