छत्तीसगढ़

पीएम आवास योजना: सरकारी फाइलों में बिना छत के ही मकानों को बना दिया तैयार, फिर भी यूपी को मिल गया नंबर वन का खिताब



प्रयागराज में तो जुलाई महीने में 140 मृतकों के नाम से पीएम आवास के आवंटन का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। वहीं 455 अपात्रों को योजना का लाभ दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर 114 ग्राम प्रधानों और 78 सेक्रेटरी को नोटिस जारी हुआ लेकिन यहां भी कुछ नहीं हुआ।

मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर में भ्रष्टाचार का मामला खुद राज्यसभा सांसद डॉ. राधा मोहन दास अग्रवाल उजागर कर चुके हैं। सांसद ने एक ऑडियो वायरल किया था जिसमें पीएम आवास का लाभार्थी सर्वेयर द्वारा घूस लेने की बात कह रहा है। गोरखपुर में बीजेपी नेता राजू सिंह ने डीएम को ऐसे 60 लोगों की सूची दी जिनके नाम किस्त जारी हो गई लेकिन एक भी ईंट नहीं रखी गई। बीजेपी नेता कहते हैं कि ‘सीएम से लेकर डीएम तक शिकायत के बाद भी जांच फाइलों में दबी है।’

यूपी के मंत्री महेंद्र सिंह खुद मान चुके हैं कि ‘प्रदेश में एक लाख से अधिक लोगों को गलत तरीके से फंड का लाभ मिला। इनमें से करीब 86 हजार ने मुकदमे के डर से फंड लौटाया है।’ साफ है, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार की बातें सरकार खुद मानती है।

गोरखपुर में पांच साल में 15 सर्वेयर बर्खास्त हुए। सहारनपुर में पूर्व विधायक राजीव गुंबर 25 हजार घूस मांगने वाले सर्वेयर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा चुके हैं। महोबा में तो घूस की रकम मिलने पर लाभार्थियों के खाते में तीन की जगह चार किस्तें भेज दी गईं। मामला खुला तो डूडा ने 79 लाख के गबन में 11 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अराजीलाईन ब्लॉक के परिजनपुर गांव में मिलते-जुलते नाम वालों के खाते में रुपये भेजे जाने पर ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।



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