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Lumpy Virus Disease: ‘लंपी’ को लेकर दहशत में पशुपालक, सूचना के बाद भी नहीं पहुंच रहे चिकित्सा अधिकारी



पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पशुपालक किसान एक बड़ी चिंता से घिर गए हैं। यहां दुधारू पशुओं में खासकर गाय और भैंस में एक गंभीर किस्म की बीमारी ने जकड़ बना ली है। जानकारों के अनुसार इस बीमारी का नाम लंपी है। इस बीमारी के प्रभाव के तहत पशुओं के शरीर पर गांठे हो जाती है और पशु शारीरिक रूप से कमज़ोर हो जाता है। पहले वो दूध देना बंद करता है उसके बाद उसकी मौत हो जाती है।

हालात यह बताते हैं कि पशुओं की स्किन की इस बीमारी लंपी ने कई जिलों में तगड़े पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। प्रत्येक गांव में संक्रमित पशु मिल रहे हैं। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली की टीम विभिन्न जिले में दौरा कर स्थिति का जायजा ले रही है जांच के लिए सैंपल लिए जा रहे हैं। फिलहाल की जानकारी यह बताई जा रही है कि लंपी बीमारी एक वायरस से आई है और संक्रामक है। लंपी ने पशुपालकों की परेशानियों को बढ़ा दिया है। गाय के शरीर पर गांठ बन रही है।

मुझेड़ा गांव के किसान जोगेंद्र चौधरी का कहना है पशु चिकित्सा अधिकारी सूचना देने के बाद भी गांव में नहीं आए हैं। यहां एक गाय ने सबसे पहले दूध देना कम किया, फिर उसने बैचेनी दिखाई दूसरे दिन गाय के शरीर पर बड़े दाने दिखाई दिए। पशुओं में आई इस संक्रामक बीमारी की किसानों में बहुत दहशत हैं। पशु अधिकारी कह रहे हैं कि पशुओं को अलग- अलग बांध रखें, अब इतनी जगह कहां से लाए! अगर कहीं यात्रा नहीं करते हैं फिर संक्रमण इतनी तेजी से कैसे फैल रहा है! यहां हजारों पशु संक्रमित हो चुके हैं।

मुजफ्फरनगर के रालोद विधायक चंदन चौहान ने बीमारी की गंभीरता को देखते हुए सरकार से इसके समुचित इलाज का अनुरोध किया है। चंदन बताते हैं कि वर्तमान समय में पशुओं में Lumpy skin disease नामक संक्रामक रोग प्रदेश के अधिकतर भागों में भयंकर रूप से फैल चुका है। जिस कारण पशुओं की मृत्यु बड़े स्तर पर हो रही है। यह किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है उक्त महामारी को उत्तर प्रदेश में फैलने से रोकने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए। वो मांग कर रहे है कि बॉर्डर जिलों में अन्य प्रदेशों के पशुओं की खरीदारी पर तुरंत रोकथाम लगाई जाए। इसके अलावा पशुपैठ के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा पशुपालकों को लंपी बीमारी के प्रति जागरुक करना चाहिए। गौशालाओं में महामारी की प्राथमिक उपचार किट उपलब्ध कराई। इसके अलावा पशुपालको को इस बीमारी से पशु की मौत पर पशुपालक को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।

लंपी बीमारी सबसे ज्यादा गायों में देखने मे आई है। इसके मामले शामली और मुजफ्फरनगर में ज्यादा देखने में आए हैं। पशु व्यापारी साबिर क़ुरैशी के अनुसार इस इलाके में पशु हरियाणा और हिमाचल से आते हैं जहां यह बीमारी पहले ही फैल रही थी। बीमारी संक्रामक है और संकर नस्ल में सबसे ज्यादा और तेजी से पकड़ करती है। गाय के दूध पीने से बछड़े में भी असर देखने मे आ रहा है। साबिर बताते हैं कि किसानों में अत्यधिक चिंता है और पशुओं की खरीदारी एकदम बंद हो गई है। बीमारी का सीधा असर पर पशुओं के व्यापार पर पड़ा है।

गौ रक्षा अभियान से जुड़े दीपक कृष्णात्रे भी इस बीमारी की गौशाला में फैलने की संभावित आशंका जताते हैं दीपक कहते हैं सड़कों से पशुओं को गौशाला में ले जाता है और रोग के संक्रामक होने के चलते वो फैल सकता है। गौशालाओं में बडी संख्या में गाय होने के कारण यह गम्भीर खतरा है। पशु चिकित्सा से जुड़े अधिकारी लापरवाह है।

किसान नेता अखिलेश चौधरी बीमारी पर पशु विभाग के प्रयासों को नाकाफी मानते हैं वो कहते हैं बीमारी फैलने के बाद अब विभाग कागजी सक्रियता दिखा रहा है। यह बीमारी 8 राज्यो में अपना प्रकोप दिखा चुकी है। अब तक हजारों पशुओं की मौत हो चुकी है। अब हवा में हाथ पैर मार कर वो खुद को तीस मार खां साबित करना चाहते हैं। अगर सरकार वास्तव में गम्भीर है तो वो पशु चिकित्सा अधिकारी गांव -गांव दौरे पर भेजे और पूर्ण गम्भीरता से मामले का निस्तारण करें। वरना किसान प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

मुजफ्फरनगर मुख्य पशु चिकित्साधिकारी दिनेश तोमर कहते हैं कि पशु चिकित्सकों के सर्वे में बीमारी के लगातार मामले सामने आ रहे हैं। पशुपालकों को बचाव के सुझाव दिए जा रहे हैं। संक्रमित पशु को स्वस्थ पशु से अलग रखकर ही बीमारी का फैलाव रोका जा सकता है। पशुपालक घबराने के बजाए सावधानी से काम लें। संक्रमित पशु को बांधने वाले स्थान पर फोरमेलिन, ईथर, क्लोरोफार्म, एल्कोहल और अन्य उपलब्ध कीटनाशक से छिड़काव कर सकते हैं।



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