छत्तीसगढ़

गुजरातः इस बार जनता के साथ हवा भी BJP के खिलाफ, सत्ता जाती देख भगवा पार्टी ने सियासी प्रबंधन के सारे घोड़े खोले



लोगों में राज्य सरकार के प्रति काफी असंतोष है। सड़कों पर आवारा घूमने वाले पशुओं के मामले में गुजरात हाईकोर्ट सख्त रहा है। अगर सरकार ने हाईकोर्ट के कहने पर सही समय पर सही कदम उठाए होते, तो शायद बीजेपी नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री नितिन पटेल के घायल होकर अस्पताल में भर्ती होने की नौबत नहीं आती। बीजेपी की तिरंगा यात्रा के दौरान नितिन आवारा पशु के हमले से घायल हो गए थे।

गुजरात में शहर की सड़कों पर मवेशियों की समस्या एक प्रमुख मुद्दा रहा है। हाईकोर्ट ने 2017 में मामले में कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। तब प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटिल ने आवश्यक कार्रवाई का आश्ववासन दिया था। राज्य विधानसभा ने इस साल 1 अप्रैल को आठ नगर निगमों और 162 शहरों में आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए एक विधेयक पारित किया था।

लेकिन इससे पशुपालक या ‘मालधारी’ समुदाय खासा नाराज हो गया और उसने आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के बहिष्कार की धमकी दे दी। इसका नतीजा यह हुआ कि विधेयक पारित होने के बमुश्किल एक हफ्ते के भीतर ही 8 अप्रैल को इसके कार्यान्वयन को रोक दिया गया। वह तो 30 अगस्त को हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अहमदाबाद नगर निगम को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी। लेकिन इससे किसी को भी हैरानी नहीं हुई क्योंकि राज्य में नीतियां बनाने की बात हो या फिर किसी फैसले पर अमल करने की, यह सब चुनावों को ध्यान में रखकर ही किया जाता रहा है और ऐसा लंबे समय से होता रहा है।



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