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गौठान पहुंच कार्यक्रम-534 गौठानों में पहुंचे नोडल अधिकारी : गौठान संचालन का लिया जायजा


रायगढ़, कलेक्टर भीम सिंह के मार्गदर्शन में आज रायगढ़ जिले में ‘गोठान पहुंच कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। जिसके तहत जिलेभर के 534 गौठानों में आज जिला व विकासखंड स्तरीय अधिकारियों द्वारा नोडल अधिकारी के रूप में निरीक्षण किया गया। इस दौरान अधिकारियों द्वारा गौठान पहुंचकर वहां कार्यरत समिति सदस्यों से चर्चा कर गौठान संचालन का जायजा लिया गया।

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निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा गौठानों में गोधन न्याय योजना का संचालन, गोबर की नियमित खरीदी, भुगतान, वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन, कुल उत्पादित एवं विक्रय पश्चात प्राप्त होने वाली कुल राशि, वर्मी कम्पोस्ट की गुणवत्ता, गोबर क्रय, चारा उत्पादन आदि का निरीक्षण किया गया। साथ ही समिति, स्व-सहायता समूह, नोडल अधिकारी के कामकाज, गौठान में गोबर क्रय के सापेक्ष वर्मी टांको की संख्या, टांको में शेड, गौठान में बाड़ी का संचालन, पानी व बिजली की व्यवस्था के साथ गौठानों में अन्य मूलभूत सुविधाओं एवं संरचनाओं के बारे में जानकारी ली गयी। इस दौरान गौठानों के बेहतर संचालन के लिए गौठान समितियों के साथ चर्चा की गयी। गौठान पहुंच कार्यक्रम के अंतर्गत जिले भर के 534 अधिकारियों को नोडल अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। जिनके द्वारा गौठान का निरीक्षण किया गया। अधिकारियों के निरीक्षण प्रतिवेदन के आधार पर गौठानों के संचालन को बेहतर करने की आगामी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

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प्रदेश में सर्वाधिक 279 स्वावलंबी गौठान रायगढ़ जिले से
छत्तीसगढ़ सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल सुराजी गांव योजना के तहत निर्मित गौठान तेजी से स्वावलंबन की ओर बढ़ रहे हैं।

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राज्य में अब तक 3006 गौठान स्वावलंबी हो चुके है। रायगढ़ जिले में सर्वाधिक 279 गौठान स्वावलंबी हुए है। दूसरे नंबर राजनांदगांव जिले में 221 तथा तीसरे क्रम जांजगीर-चांपा जिला है, जहां 190 गौठान स्वावलंबी हुए हैं।

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कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार गरियाबंद जिले में 26, धमतरी में 130, बलौदाबाजार में 101, महासमुंद में 170 तथा रायपुर जिले में 85, कबीरधाम में 141, दुर्ग में 185, बालोद में 67, बेमेतरा में 78, कोरबा में 175, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 28, बिलासपुर में 101, मुंगेली में 82, कोरिया में 121, जशपुर में 75, बलरामपुर में 80, सरगुजा में 105, सूरजपुर में 94, कांकेर में 144, कोण्डगांव में 80, दंतेवाड़ा में 64, नारायणपुर में 7, बस्तर में 102, बीजापुर में 23 तथा सुकमा जिले में 52 गौठान स्वावलंबी बन चुके हैं।