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ब्रह्मास्त्रः औसत पटकथा और संवाद के साथ रणवीर मोह में डूबी फिल्म, अपने वीएफएक्स और गीतों से बांधती है



संवाद औसत तो पटकथा लेखन में भी कमी

फिल्म का संवाद लेखन, औसत कहा जा सकता है। शाहरुख द्वारा बोला गया संवाद ‘वो शिकार ही क्या जिसमें थोड़ा शोर न हो‘ ठीक है, तो अमिताभ द्वारा बोला गया संवाद ‘एक आदमी की पहचान उसके हुलिए से नहीं होती, अंदर की शक्ति से होती है‘ औसत ही है। ‘लाइट को समझा नही जाता बस महसूस किया जाता है‘ संवाद फिल्म के साधारण संवादों का एक और उदाहरण है।

ब्रह्मास्त्र के पटकथा लेखन में काफी रिसर्च किया गया होगा। पात्रों और अस्त्रों के नाम पर, उन अस्त्रों के काम पर खूब शोध किया हुआ लगता है। इस काल्पनिक दुनिया को बुनते समय आलिया और रणवीर के बीच का रिश्ता इस तरह लिखा गया है कि यह दर्शकों को कभी-कभी उबाने लगता है। आलिया के किरदार को बिना ज्यादा सोचे समझे प्रेम के प्रति इतना समर्पित दिखाना, आज की पीढ़ी के दर्शकों को इतना ज्यादा समझ नहीं आएगा। दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है, जब यह फिल्म 2019 में रिलीज होनी थी तब शायद इस बिना सोचे-समझे वाले प्रेम समर्पण को पचाना आसान होता पर आज नहीं।



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