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कांग्रेसी प्रवक्ता के विज्ञप्ति पर भाजपा का पलटवार : कहा-घर जमाई गोपाल वाघे का बयान झूठ का पुलिंदा:मनोहर पटेल


नवीन जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ में शामिल नहीं होने की मांग पर बीते रविवार को बरमकेला में जिला संघर्ष समिति के द्वारा चक्काजाम किया गया था जिसे लोगों का व्यापक समर्थन मिला था।
‌वहीं चक्काजाम करने के बाद अब क्षेत्र में सियासत शुरू हो चुकी है। बहरहाल अब देखना होगा कि यह सियासत कहां जाकर थमती है।
फिलहाल इस मामले में भूपेश सरकार की सारी गतिविधियां संदिग्ध नजर आ रही है। क्षेत्र की जनता से किए गए वादे को यदि कांग्रेस की भूपेश सरकार द्वारा पूरा नहीं किया जाता है तो निश्चित रूप से आसन्न विधानसभा चुनाव में खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है?
बरमकेला मण्डल भाजपा के अध्यक्ष मनोहर पटेल ने कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल वाघे के द्वारा चक्काजाम आंदोलन को असफल करार देने वाले बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि गोपाल वाघे का बयान झूठ का पुलिंदा है। वे मूलतः सारंगढ़ के रहने वाले तथा इस क्षेत्र के घर जमाई है इससे साफ जाहिर होता है कि बाहरी व्यक्ति यहां कि दु:ख दर्द को कैसे समझ सकता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र का का अन्न जल ग्रहण करके गुजर-बसर कर रहे वाघे जी को क्षेत्र के खिलाफ जहर उगल रहे हैं जो बेहद हास्यास्पद है। गोपाल वाघे जी आपने व्यक्ति विशेष की गुलामी करते हुए ऐसी काला चश्मा पहन रखा हैं जिसमें 45 डिग्री से भी अधिक तापमान भीषण गर्मी के बावजूद हजारों की संख्या में चक्काजाम आंदोलन में क्षेत्र के कोने-कोने से आए हुए जनप्रतिनिधि एवं नागरिक आपको दिखाई नहीं दिया।
मनोहर पटेल ने मुख्यमंत्री की वादे को याद दिलाते हुए कहा कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में बरमकेला विकासखंड को जुड़ने की दावा करके कांग्रेसी प्रवक्ता अपने ही मुख्यमंत्री को झूठा करार देने में लगे हुए हैं। वहीं जो लोग सारे दफ्तर सारंगढ़ में ही खुलेंगे इस बात की गारंटी नहीं दे पा रहे हैं वहीं लोग इस तरह की बयानबाजी करके अपने राजनैतिक आकाओं को खुश करने तथा खुद का नंबर बढ़ाने में लगे हुए हैं।
श्री पटेल ने गैर जिम्मेदाराना बयान देकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे लोगों से सवाल किया और कहा कि मुख्यमंत्री के कथनानुसार दावा आपत्ति के दौरान समय-सीमा में क्षेत्र के 225 गांव के 16 हजार लोगों ने सामुहिक हस्ताक्षर करके अपनी आपत्ति दर्ज कराई कि हम रायगढ़ में रहना चाहते हैं 13 हजार लोगों ने व्यक्ति गत उपस्थित होकर आवेदन प्रस्तुत किया था कि हम रायगढ़ में ही रहना चाहते हैं।इसी तरह 96 ग्राम पंचायत के प्रस्ताव,224 ग्राम सभाओं के प्रस्ताव,जनपद पंचायत बरमकेला तथा विकासखंड के दोनों नगर पंचायत बरमकेला व सरिया ने भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करके दिया है कि हम रायगढ़ जिले में यथावत रहना चाहते हैं इसके बाद कोई नहीं बच जाता जो ये कहे कि हम रायगढ़ में रहना नहीं चाहते हैं।सारे लोगों ने एक स्वर में रायगढ़ में रहने की इच्छा जताई है फिर भी बरमकेला को रायगढ़ जिले में यथावत रखने का निर्णय छत्तीसगढ़ द्वारा क्यों नहीं लिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र के सभी सरपंच,सभी जनपद सदस्य,सभी जिला पंचायत सदस्य,दोनों नगर पंचायत पदाधिकारी समेत सारे राजनैतिक दल के जनप्रतिनिधि एक साथ मिलके नवाखाई जैसे पवित्र त्यौहार के दिन माननीय मुख्यमंत्री को उनके निवास रायपुर में निवेदन किया था कि हम रायगढ़ जिले में ही रहना चाहते हैं इसलिए हमको रायगढ़ जिला में रखा जाए किसी भी दृष्टि से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला हमारे लिए उचित नहीं है उसके कारण भी गिनाएं बिलाईगढ़ की दूरी बहुत है।इस रास्ते में पहाड़ी है,घाटी है,जंगल है,गोमर्डा अभ्यारण्य है,नक्सली गतिविधि है तथा इस रास्ते में आए दिन अनहोनी घटनाएं होती रहती परिणाम स्वरूप इस रास्ते में आवागमन करना क्षेत्र के लोगों के लिए दूभर है। दूसरी तरफ रायगढ़ हमारे लिए सर्व सुविधायुक्त है। मेडिकल कॉलेज,इंजीनियरिंग कॉलेज,जैसे अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध है। फिर भी ये लबरा सरकार बरमकेला विकासखंड को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला में जोड़कर क्षेत्र को गर्त में क्यों धकेलना चाह रही है? वहीं इस सरकार की ऐसी क्या मजबूरी थी कि उसने बिना मांग किए सारंगढ़ के साथ बिलाईगढ़ का नाम जोड़ दिया।
इन सभी तथ्यों के बाद भी भूपेश सरकार का रवैया जनमत के साथ खिलवाड़ करने की है तो आने वाले समय में क्षेत्र की जनता कांग्रेसियों को मुंहतोड़ जवाब देगी।