छत्तीसगढ़

मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपी बीजेपी विधायक दोषी करार, कोर्ट ने सुनाई 2 साल की सजा



आपराधिक घटना को सांप्रदायिक रंग देने का आरोप

मुजफ्फरनगर के जानसठ थाना क्षेत्र में आने वाले कवाल गांव में 27 अगस्त 2013 को एक विवाद में शाहनवाज, गौरव और सचिन की हत्या की अपराधिक घटना का सांप्रदायिकरण इस भीषण दंगे का आधार माना जाता है। विक्रम सैनी इसी कवाल गांव के रहने वाले हैं और उस समय वो गांव के प्रधान थे। आरोप है कि घटना के बादसैनी अत्यधिक रूप से सक्रिय हो गए और माहौल को अलग रंग देने लगे। अब पास की विधानसभा क्षेत्र खतौली के विधायक हैं। दंगे की जख्मी यादों के बीच बहुत से मामलों में समझौते हो गए और बेघर हुए हजारों लोगों में से ज्यादातर वापस लौट गए। जान और माल के उस भारी नुकसान को मुजफ्फरनगर के लोग कवाल गांव से ही जोड़कर देखते हैं। 

लोगों के अनुसार 29 अगस्त को गांव में हिंसा की घटना हुई, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय पर हमला हुआ। इसके बाद गांव में बढ़ती तनातनी के बीच कवाल से 2 किमी दूर नगला मंदौड़ के सरकारी स्कूल के मैदान में पंचायत हुई और हिंसा की नींव पड़ी। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद विक्रम सैनी को हिंसा के कई मामलों में जेल भेजा गया था और उनके विरुद्ध रासुका के तहत कार्रवाई की गई थी। एक साल से अधिक जेल में बिताने के बाद विक्रम सैनी जमानत पर बाहर आए और जिला पंचायत सदस्य चुनाव लड़े और जीत गए।



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