छत्तीसगढ़

बिलकिस बनो केस: राहुल-प्रियंका गांधी ने मोदी सरकार की चुप्पी पर खड़े किए सवाल, कहा- बलात्कारियों को बचा रहा केंद्र



क्या है मामला?

गौरतलब है कि 2002 के गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान दंगाइयों ने बिलकिस का सामूहिक बलात्कार किया था। उस समय वह 21 साल की थी और पांच महीने की गर्भवती थी। उसके परिवार के सात सदस्यों की दंगाइयों ने हत्या कर दी थी। उनका मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दिया गया था और सुप्रीम कोर्ट के कहने पर मुकदमे को गुजरात से महाराष्ट्र स्थानांतरित कर दिया गया था।

21 जनवरी, 2008 को मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार और परिवार के 7 सदस्यों की हत्या मामले में 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी उनकी सजा को बरकरार रखा था। लेकिन, 14 साल बाद, गुजरात सरकार द्वारा गठित एक पैनल द्वारा सजा की छूट के लिए उनके आवेदन को मंजूरी देने के बाद सभी दोषियों को रिहा कर दिया गया।

दोषियों की रिहाई पर बिलकिस बानो ने क्या कहा था

दोषियों को रिहा किये जाने के फैसले के बाद बिलकिस बानो ने कहा था कि इतना बड़ा और अन्यायपूर्ण फैसला लेने से पहले किसी ने उनकी सुरक्षा के बारे में नहीं पूछा । गुजरात सरकार से इसे बदलने और ‘बिना डर के शांति से जीने’का अधिकार देने को कहा। बिलकिस बानो की ओर से उनकी वकील शोभा ने कहा था कि दो दिन पहले 15 अगस्त, 2022 को जब मैंने सुना कि मेरे परिवार और मेरी जिन्दगी बर्बाद करने वाले, मुझसे मेरी तीन साल की बेटी को छीनने वाले 11 दोषियों को आजाद कर दिया गया है तो 20 साल पुराना भयावह अतीत एक बार फिर सामने आ गया है।



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