छत्तीसगढ़

भीमा कोरेगांव केस: SC ने आनंद तेलतुंबड़े की जमानत को रखा बरकरार, NIA की याचिका खारिज की, लगाई फटकार



पीठ ने एनआईए के वकील से पूछा कि तेलतुंबड़े की क्या भूमिका है? एनआईए का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि यूएपीए कानून के तहत यह आवश्यक नहीं है कि आतंकवादी हमला हो तभी कोई केस बनेगा। प्रतिबंधित संगठन के लिए काम करना भी यूएपीए के तहत आता है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, आईआईटी मद्रास के कार्यक्रम में यह आरोप लगाया गया कि वह दलितों को संगठित कर रहे हैं। क्या दलितों को संगठित करना प्रतिबंधित गतिविधि है? भाटी ने जवाब दिया, नहीं, मेरे कहने का मतलब यह नहीं था, वह एक प्रोफेसर हैं और वह जो कुछ भी कहना चाहते हैं, कह सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि अदालत को सीपीआई (एम) के काम करने के तरीके के बड़े कैनवास को देखना चाहिए और वे दिखा सकते हैं कि वह विचारधारा के प्रचार, आयोजन, फंड ट्रांसफर आदि में संगठन से जुड़ा हुआ है। विस्तृत दलीलें सुनने के बाद पीठ ने कहा कि वह एनआईए की याचिका खारिज कर रही है।



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