छत्तीसगढ़

छावला गैंगरेप के आरोपियों के बरी होने पर सदमे में पीड़िता के माता-पिता, कहा- जीने की इच्छा ही खत्म हो गई



दिल्ली के छावला इलाके में 2012 में हुए गैंगरेप के मामले में सभी तीन आरोपियों के बरी होने पर लोगों में नाराजगी है। आरोपियों के बरी होने के बाद पीड़िता के माता-पिता सदमे में हैं। उन्होंने दुखी मन से कहा कि “हम न केवल जंग हार गए हैं, बल्कि हमारी जीने की इच्छा भी खत्म हो गई है।”

पीड़िता की मां ने आगे कहा कि 11 साल बाद भी यह फैसला आया है। हम हार गए। हम जंग हार गए। मैं उम्मीद के साथ जी रही थी। मेरे जीने की इच्छा खत्म हो गई है। पीड़िता के पिता ने तो कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले से न्यायपालिका पर उनका विश्वास उठ गया है।

बता दें कि बीते दिनों दिल्ली के छावला गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने चौंकाने वाला फैसला सुनाया था। कोर्ट ने साल 2012 के गैंगरेप कांड के 3 दोषियों को बरी करने का आदेश दिया था। हालांकि, इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों को जानवर तक करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला त्रिवेदी की पीठ ने दोषियों को बरी करने का आदेश दिया है।

क्या था पूरा मामला

9 फरवरी 2012 को दिल्ली के छावला इलाके से उत्तराखंड की 19 साल की लड़की का अपहरण कर लिया गया था, जिसकी जली हुई लाश 14 फरवरी को हरियाणा के रेवाड़ी में एक खेत में मिली थी। मामले में तीन आरोपी रवि, राहुल और विनोद पकड़े गए थे, जिन्हें 2014 में निचली अदालत ने दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी फांसी की सजा को बरकरार रखा था। साथ ही कोर्ट ने दोषियों पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि ये वो हिंसक जानवर हैं, जो सड़कों पर शिकार ढूंढते हैं।

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