छत्तीसगढ़

झारखंड: जांच एजेंसियों की कार्रवाई, राज्यपाल से टकराव, अदालतों के चक्कर के बाद भी फ्रंट फुट पर बैटिंग कर रहे हेमंत सोरेन



हाल में सोरेन को अपने खिलाफ दायर पीआईएल को निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई चक्कर लगाने पड़े। राहत की बात यह रही कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया। पिता शिबू सोरेन की संपत्ति की जांच की मांग पर लोकपाल की कार्रवाई को रुकवाने के लिए भी उन्हें अदालतों के चक्कर लगाने पड़े हैं। इस मामले में भी उन्हें फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली हुई है।

सोरेन के सामने सबसे बड़ी मुश्किल अवैध खनन के जरिए मनी लॉंड्रिंग के मामले में ईडी के समन की वजह से खड़ी हुई है। ईडी ने दूसरी बार समन जारी कर उन्हें 17 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया है। सोरेन को आशंका है कि इस मामले में ईडी की कार्रवाई आगे बढ़ी तो उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है। यही वजह है कि ईडी ने जब पहली बार समन जारी कर उन्हें 3 नवंबर को पूछताछ के लिए बुलाया था, तब उन्होंने एक तरफ अपनी व्यस्तता का हवाला देकर ईडी से तीन हफ्ते का समय मांगा थी तो दूसरी तरफ अपने आवास के बाहर झामुमो के हजारों कार्यकर्ताओं की भीड़ को संबोधित करते हुए ईडी को सीधे तौर पर गिरफ्तार करने की चुनौती दी थी। अब शुक्रवार को विधानसभा के विशेष सत्र में भी उन्होंने ईडी और केंद्रीय एजेंसियों के कदमों को बीजेपी के इशारे पर की जा रही कार्रवाई बताया। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर उन्हें जेल जाना पड़ा तो वहां रहकर भी झारखंड से बीजेपी का सूपड़ा साफ करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री तक को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे फोन पर धमकियां देने लगे हैं।

कुल मिलाकर, आने वाले दिनों की संभावित मुश्किलों के एहसास के बाद भी सोरेन फ्रंट फुट पर खेल रहे हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि उन्हें पता है कि आखिरी जंग सियासत और चुनाव के मैदान पर ही होनी है। यहां जो जीता, सिकंदर वही कहलाएगा।



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